06 जुलाई, 2010

मैं तुम्हें पा कर रहूंगी

इस चमक दमक कि दुनिया में ,
तुम्हारी तलाश मुझे रहती है ,
क्यूँ फीके रंगों की बात करूं ,
समा रंगीन बर्बाद करूं ,
हर सुबह तुम्ही से होती है ,
हर शाम तुम्हीं से होती है ,
मैं शमा जलाए बैठी हूं ,
हर रात तुम्ही में खोती है ,
केवल एक झलक पाने को ,
मन की प्यास बुझाने को ,
कितने ही यत्न किये मैने ,
पर कभी सफलता पा न सकी ,
इस दूरी को मिटा न सकी ,
सारा बैभव छोड़ दिया ,
दुनिया से खुद को दूर किया ,
एकाग्र मना मैं सोच रही ,
तुम जैसा खुद को ढाल रही ,
कभी तो मन पसीजेगा ,
अपनी ओर आकृष्ट करेगा ,
यह तो एक ऐसा बंधन है ,
जिसे समझना मुश्किल है ,
अदृश्य नियंता ने जाने कब ,
मुझको इसका भान कराया ,
तुम्हीं को पाने के लिए ,
बंधन प्रगाढ़ बनाने के लिए ,
मैं सारी हदें पार करूंगी ,
तलाश मेरी जब पूरी होगी ,
पूरे दिल से सत्कार करूंगी ,
कितनी भी कठिनाई आए ,
मैं तुम्हें पा कर ही रहूंगी |
आशा

11 टिप्‍पणियां:

  1. बंधन प्रगाढ़ बनाने के लिए ,
    मैं सारी हदें पार करूंगी ,
    तलाश मेरी जब पूरी होगी ,
    पूरे दिल से सत्कार करूंगी ,

    प्रेम की गहरी अभिव्यक्ति ।

    जवाब देंहटाएं
  2. मगर प्रेम का सौंदर्य सिर्फ उसके पा जाने में ही नहीं है

    आत्मविश्वास से भरपूर कविता ...बना रहे यह विश्वास ...
    शुभकामनायें ..!

    जवाब देंहटाएं
  3. अति सुन्दर ! ऐसा ही आत्मविश्वास और लगन बनी रहनी चाहिए तभी लक्ष्य की प्राप्ति आसान होगी ! बढ़िया और उद्देश्यपूर्ण रचना !

    जवाब देंहटाएं
  4. यह दृढ निश्चय मन को भाया ...अच्छी प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत भाई मेरे मन को आपकी कविता और कविता की शैली.........

    बधाई !

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत पुरानी यह पोस्ट देखी बहुत आश्चर्य हुआ
    आशा

    जवाब देंहटाएं
  7. तुम्हीं को पाने के लिए ,
    बंधन प्रगाढ़ बनाने के लिए ,
    मैं सारी हदें पार करूंगी ,
    तलाश मेरी जब पूरी होगी ,
    पूरे दिल से सत्कार करूंगी ,
    कितनी भी कठिनाई आए ,
    मैं तुम्हें पा कर ही रहूंगी |

    वाह! बहुत सुन्दर आशा है,आशा जी.

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  9. वाह! वाह! सुन्दर रचना...
    सादर बधाइयां....

    जवाब देंहटाएं

Your reply here: