16 अक्तूबर, 2010

बस एक आस

बस एक आस ,
ओर आत्म विश्वास ,
जीवन में भरते प्रकाश ,
होती इतनी गहराई ,
ओर सच्चाई,
अटूट ह्रदय मै ,
तभी टिक पाता है,
कोइ विचार ह्रदय मै ,
कोइ झूमे वह झूमता है ,
गीतों के साथ गुनगुनाता ,
नहीं चाहता ,
अवसाद कोइ ,
मंथर गति से चलता है ,
गतिमान उसे,
करने के लिए ,
बस काफी है,
एक आस ,
ओर यदि मिल जाए ,
साथ आत्म बिश्वास का ,
तब कोइ नहीं,
रोक पाता ,
विचारों मै,
व्यवधान न आता,
चिंतन मनन,
सतत चलता है ,
निरंतरता उसमे होती है
,जीवन भी,
अस्थिर नहीं रहता ,
बहुत सरल हो जाता है ,
कोइ भी बंधन तब ,
उसे बांध नहीं पाता ,
बहता निर्मल जल सा ,
विचलित ना हो पाता ,
सदा प्रफुल्लित रहता |
आशा

2 टिप्‍पणियां:

  1. बस एक आस ,
    ओर आत्म विश्वास ,
    जीवन में भरते प्रकाश
    आस और विश्वास ही तो जीवन के आधार हैं
    सुन्दर रचना

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  2. इस एक आस और विश्वास की डोर थाम कर इंसान बड़ी से बड़ी बाधाएं पार कर लेता है ! इसकी पतवार हाथ लग जाए तो वह भवसागर भी तैर कर पार करने का हौसला रख सकता है ! लेकिन यह दुर्लभ है और अनमोल है ! जिसे मिल जाए वह सच्चे अर्थों में धनवान है ! सुन्दर प्रस्तुति ! बधाई !

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