07 दिसंबर, 2010

जो भूल न पाया


छूट गये सब संगी साथी
सभी से दूर हो गया 
साथ हैं केवल यादें
जो बार-बार साकार हो
स्मृति पटल पर
रखी किताब के
पिछले पन्ने खोल देती 
ना ही भुलाना चाहता
 ना ही भूल पाता है !
और लौट जाता है
बचपन क़ी मीठी यादों में
रंग बिरंगी अंटियाँ ले
करता इंतज़ार मित्रों का
जैसे ही कोई आता
खेल शुरू हो जाता था
कभी सड़क पर दौड़ लगाता
हल्ला गुल्ला और शरारत
छेड़ छाड़ और बतियाना
आते जाते लोगों से
क्या यह वही नटखट है
कुछ समानता तो दिखती है
पर पहचान नहीं पाता
धुँधली होती स्मृति को
विश्वास नहीं होता !
कुछ रुक कर आगे बढ़ता है
अगला पन्ना खोलता है
कुछ उम्र बढ़ी कुछ लम्बाई
आसमान छूना चाहा
प्रोत्साहन और कठिन परिश्रम
दोनों ने अपना रंग दिखाया
और बना वह बड़ा ऑफीसर !
पर बहुत कुछ पीछे छूट गया
ना सड़क पर होता खेल
और न होती कुट्टी मिठ्ठी
ना ही कोई लड़ाई झगड़े
बस सिलसिला शुरू हुआ
'जी सर का 'और
कुर्सी को सलाम का !
जब से सेवा मुक्त हुआ है
आस पास का जमघट
जाने कहाँ तिरोहित हो गया
रह गया वह नितांत अकेला
खोजता है कोई मिले
जिससे कुछ कह सुन पाये
बीता कल बाँट पाये
मन में उठी भावनाओं को
साकार शब्दों में कर पाये |


आशा

05 दिसंबर, 2010

नहीं होता जीवन एक रस


नहीं होता जीवन एक रस
कभी सरस तो कभी नीरस
जब होता जीवन संगीत मय
 हँसी खुशी रहती है
तभी जन्म ले पाती हैं
राग रागिनी और मधुर धुनें
जब हो जाता जीवन अशांत
थम जाता मधुर संगीत
धुनें या तो बनती ही नहीं
बन भी जायें यदि
मधुरता हो जाती गुम
समय के साथ-साथ
होते परिवर्तन दोनों में
समय निर्धारित है
हर राग गाने का
सही समय पर गाया जाये
तभी मधुर लगता है
बेसमय गाया राग
कर्ण कटु लगता है
समानता दोनों में है
पर है एक अन्तर भी
जीवन तो क्षणभंगुर है
संगीत स्थाईत्व लिये है
प्रकृति के हर कोने में
बिखरा पड़ा है संगीत
है यह मानव प्रकृति
उसे किस रूप में अपनाए
अपने कितने निकट पाए 
सृजन संगीत का
समय के साथ होता जाता है |


आशा

03 दिसंबर, 2010

एक छोटी सी गली


जीवन के कई रंग देखे
इस छोटी सी गली में
भिन्न-भिन्न लोग देखे
इस सँकरी सी गली में
प्रातःकाल भ्रमण करते
बुजुर्ग दिखाई देते 
जाना पहचाना हो
या हो अनजाना
हरिओम सभी से कहते 
जैसे ही धूप चढ़ती 
सभी व्यस्त हो जाते 
कोई होता तैयार
ऑफिस जाने के लिये
कोई बैठा पेपर पढ़ता
हाथ में गर्म चाय का प्याला ले !
बच्चों की दुनिया है निराली
करते शाला जाने की तैयारी
आधे अधूरे मन से
किसी का जूता नहीं मिलता
तो किसी का बस्ता खो जाता
फिर भी नियत समय पर
ऑटो वाला आ जाता
इतना शोरशराबा होता
तब कोई काम ना हो पाता
फिर भी जीने के अंदाज का
अपना ही नजारा होता |
भरी दोपहर में काम समाप्त कर
जुड़ती पंचायत महिलाओं की
करती रहतीं सभी वकालत
अपने अपने अनुभवों की !
है विशिष्ट बात यहाँ की
हर धर्म के लोग यहाँ रहते 
इस छोटी सी तंग गली में
सभी धर्म पलते हैं
अनेकता में एकता क़ी
अद्भुत मिसाल दिखते हैं |
सारे त्यौहार यहाँ मनते 
मीठा मुँह सभी करते हैं
अगर कोई समस्या आये
सभी सहायता करते हैं |
हिलमिल कर रहते हैं सभी
छोटा भारत दिखते हैं
यथोचित सम्मान सभी का
सभी लोग करते हैं
है तो यह छोटी सी गली
पर राखी, ईद, दिवाली, होली ,
सभी यहाँ मनते हैं |


आशा