07 फ़रवरी, 2012

साथ चला साये सा

है मृत्यु कितनी दुखदाई 
अहसास  उसका इससे भी गहरा 
उर  में छिपे ग़मों को  
बाहर  आने नहीं देता |
पहचान  हुई जब से 
 साथ नहीं छोड़ा 
  साथ  चला साये सा 
लगने   लगी रिक्तता उसके बिना |
है  दुनिया बाजार ग़मो का 
जगह  जगह वे बिकते 
कई  होते खरीदार 
विक्रेता  बेच कर चल देते |
कहाँ  कहाँ नहीं भटका
अशांत मन लिए
काँटों  के अलावा कुछ न मिला
सीना  छलनी हुआ 
तब  उन्हीं ने साथ  दिया |
यदि है  यही दस्तूर  दुनिया का
हम भी उनका साथ न छोड़ेंगे 
छिपा  कर दिल में उन्हें  
साथ उन्हीं  के जी लेंगे |
आशा 




















05 फ़रवरी, 2012

प्रतीक्षा

                                                                                                 
ह्रदय  पटल पर
अंकित शब्द 
जो  कभी सुने थे 
यादों  में ऐसे बसे 
कि  भूल नहीं पाता
कहाँ कहाँ नहीं भटका 
खोज  में उसकी 
मिलते  ही 
क्यूँ न बाँध लूं 
उसे  स्नेह पाश में 
जब  भी किसी
गली तक पहुंचा
मार्ग अवरुद्ध मिला
जब उसे नहीं पाया 
हारा  थका लौट आया 
आशा  का दामन न छोड़ा
लक्ष्य  पर अवधान रहा
आगे क्या करना है
बस यही मन में रहा 
हो  यदि दृढ़ इच्छा शक्ति
होता कुछ भी नहींअसंभव
फिर भी यदि
वह नहीं मिल पाई
आस का दीपक जला 
चिर  संध्या तक 
प्रतीक्षा करूँगा
आशा














03 फ़रवरी, 2012

पहाड़ उसे बुला रहे

अश्रुपूरित नयनों से
वह देखती अनवरत
दूर उस पहाड़ी को
जो ख्वाव गाह रही उसकी
आज है वीरान
कोहरे की चादर में लिपटी
किसी उदास विरहनी सी
वहाँ खेलता बचपन
स्वप्नों में डूबा यौवन
सजता रूप
किसी के इन्तजार में
है अजीब सी रिक्तता
वहाँ के कण कण में
गहरी उदासी छाई है
उन लोगों में
भय दहशतगर्दों का
विचलित कर जाता
वे चौंक चौक जाते
आताताई हमलों से
कई बार धोखा खाया
पर प्रेम बांटना ना भूले
जो भी द्वारे आए
उसे ही प्रभु जान लेते
पहाड़ उसे बुला रहे
याद वहां की आते ही
वह खिचती जा रही
बंधी प्रीत की डोर में |
आशा