16 मई, 2018

वह जन्नत की हूर







एक झलक देखा उसको
मन मोह कर चली गई
सहज सरल पुरनूर चेहरा
जैसे हो चाँद का टुकड़ा
जमाने की बुरी नजर से
उसे महफूज रखते
पर जमीन पर पैर न पड़ते
बड़ा गर्व महसूस करते
अल्लाह की नियामत समझ
उस जन्नत की हूर का
दूर दूर तक चर्चे
उसकी सुन्दर छबि के होते थे
मशहूर हुई नजाकत के लिए
मोहक अदाओं के लिए
पर मद के नशे से कोसों दूर
लेकिन नहीं मगरूर |
आशा