08 अगस्त, 2022

हम जैसा कोई नहीं




जब  से साथ रहे जाने कितनी
समस्याओं की खोज में जुटे 

तब एक भी समस्या न हुई  

|कभी जिन्दगी बेरंग न हुई 

                                                                 जब खुद को सक्षम पाया मैंने

यदि होती  दृढ़ता  मुझ में  तुम में 

कोई गला नहीं पकड़ता बिना बात 

सारी शिकायतें  दूर होती  चुटकी में |

जान गई हूँ डरने से कोई लाभ न होता 

हिम्मत से तार  जुड़ते जाते है 

कोई उंगली उठा नहीं सकता 

किसी गलत या सही  शिकायत पर 

बस झटका जरूर लगता है दिल पर |

क्या हमारी इतनी औकात न थी 

हमने क्या किया था बता पाते

                                                                   पर हमारे हाथ  में कुछ न था 

अब बेकस मजबूर हो कर रह गए थे |

आशा 




06 अगस्त, 2022

संगम कविता का कविता से



कविता से कविता का संगम

जब भी होता एक अनोखा रंग

सभी के जीवन में होता

यही सोचना पड़ता

यह  कैसे हुआ कब हुआ |

जो भी हुआ जाने क्यों हुआ

पर रंग महफिल में जमा ऐसा

बेचैन मन को सुकून मिला

जिसकी तलाश थी मुझे बरसों से  |

 जब भी बेकरार होती हूँ

मेरा मन बुझा बुझा सा रहता है

नयनों का तालाब भर जाता है

छलक जाता तनिक अधिक वर्षा से |

एक यह ही समस्या है ऐसी

 जो मुझे उलझाए रहती अपने आप में

कुछ सुधार नहीं होता अधीर  मन ममें 

अच्छी बुरी  सब बातों का जमाव

 उद्वेलित करता मेरे मन को  

होती जाती दूर्  कविता के संगम से

जिसकी मुझे आवश्यकता थी |

आशा 

आशा

04 अगस्त, 2022

यही है प्यार की रीत


 


कभी पास आना आकर दूर चले जाना
कितनी खुशामद करवाना फिर भी न खुश होना
जब होता असंतोष का गीत
यही है प्यार की रीत |
मैंने कभी न चाहा तुम्हारा प्यार मिले
पर वरद हस्त का मुझे उपहार अवश्य मिले
जब भी चाहूँ मेरी मदद के लिए आजाओ
यही होगा बहुत उपकार मुझ पर |
इसी लिए जीने की चाह रहती मुझको
न कोई चाहत न लागलपेट है मुझको
नहीं चाहती मुझे किसी का अधिकार छीनूँ
मेरा अधिकार ही मिल जाए जिसकी अपेक्षा रही मुझे |
आशा

03 अगस्त, 2022

तेरी तस्वीर


 

तेरी तस्वीर मेरा मन में

कुछ ऎसी समाई कि

उससे छुटकारा न पाने की

 मैंने कसम सी  खाई |

जब भी मैं कहीं जाती 

तेरी यादों मैं खोई रहती

इस तरह कि मैं भूल ही जाती

 क्या करने आई थी क्या कर डाला |

यही  बेखुदी मुझे खुद की  समस्याओं में

उलझाए रखती उबरने न देती

अपने आप में समेटे रखती

मुझे असामाजिक बनाती जाती |

मैं कहीं की न रहती

उलझनों में फंसी रहती

सब की दृष्टि में गिर जाती

किसी से नजरें न मिला पाती |

आशा

01 अगस्त, 2022

संयम

 




                संयम आवश्यक है

सफलता की दौड़ में

जिसने यह सोच लिया

उसी ने की हांसिल

जीवन की रंग रलियाँ

जीवन में आगे बढ़ने के लिए

है यही मूलमंत्र |

धीमें धीमें चलना

आगे बढ़ने के लिए

बहुत कुछ खोना पड़ता है

कुछ नया  पाने के लिए |

जिसने भी सयम खोया

मन को संतप्त किया

कभी भी उस ऊंचाई  तक

न पहुँच पाया

यही समय मिला उसको

अपनी पराजय पर

घोर असंतोष जाहिर करने का |

प्रकृति का आलम


 

भावों की उत्तंग तरंगें

जब विशाल  रूप लेतीं

मन के सारे तार छिड़ जाते

उन्हें शांत करने में |

पर कहीं कुछ बिखर जाता

किरच किरच हो जाता

कोई उसे समेंट  नहीं पाता

अपनी बाहों में |

कितने भी जतन करता 

मन का बोझ कम  होने का

नाम ही न लेता

मचल जाता छोटे बालक सा |

यही प्रपंच शोभा न देता

एक परिपक्व्  उम्र के व्यक्ति को

वह हँसी का पात्र बनता

जब महफिल सजती और  

वह अपनी रचनाएं पढता |

वह सोचता लोग दाद दे रहे हैं

पर यहीं वह गलत होता

कवि  कहलाने की लालसा

उसे अपनी कमियों तक

पहुँचने नहीं देतीं 

जन मानस तो दाद की जगह

उपहास में व्यस्त रहता तालियाँ बजाने में  |

वह कितनी ही  बार सोचता

उसने क्या लिखा किस पर लिखा 

पर थाह नहीं मिल पाती |

 यहीं तो कमीं रह जाती

वह  क्या सोचता

पर किससे  कहता

सब समझ से परे होता |

आशा

 


29 जुलाई, 2022

हाइकू

 १-कलह नहीं 

सद्भाव  ही चाहिए 

यही है मांग 


२-तुम्हारा प्यार 

है एक छलावा ही 

कैसे कहती 


३-मुझे प्यार दो 

कहना है सरल 

पर न कहा 


४-छलकी आँखें 

वह हादसा  देख 

धैर्य खो गया 


५-सारे तीर्थ हैं 

विश्वास  के गढ़ ही 

हैं व्यक्तिगत 


६-राम जन्में 

सरयू नदी तीर 

अयोध्या में 


७-पैर पखारे 

पवित्र पावन हैं 

पद राम के 


८- नमन प्रभु 

राम  और सीता  को 

मिलती शान्ति 

आशा