28 मार्च, 2024

जब रात स्वप्न

 

जब रात स्वप्न

 मन में से

 आने जाने लगे

उन को मन में

 बसने दिया जाए

कब तक उस पर निर्भर रहे

 नही कहां  जा सकता|

मन के अनुसार चला

  सकता |

आशा सक्स्ना

26 मार्च, 2024

कविता के रंग और रस

 

यही भावनाएं उलझीं कवि की रचना में  

है इतनी शक्तिशाली उलझी शब्द शैली

उसमें रही हमारे मन की भावनाएं हमारे मन की भावनाए

 है कवि की रचना  इतनी शक्तिशाली

  उस में रहरी हमारे मन की भावनाएं

जिनकी मन से कभी दूर नहीं हो पाती

यही भावनाएं उलझी उसमें |

आशासे दूरना होना सहों सकी

भी दूर नहीं हो पाती

यही विषेशताहै कविता की

तभी चाहत रही  आज के कावियों की |

आशा

 

25 मार्च, 2024

राधे के संग

बरसाने    की कुवरि राधिका 

आईं जमुना तीर राधिका 

कई रंगों से खेली होली

 राधा रमन  के संग 

भक्तों के संग  कई मार्गों  पर  खुद को |

खुद को पूरी तरह फूलों मैं उलझी  

हुई सफती भक्ति  में  

आशा सक्सेना