03 जून, 2021

मन मयूर


                           मन मयूर  

कभी गुनगुनाता

गाता नाचता

मगन होता 

आनेवाले कल का 

 आगाज  कर

अपनी दशा  जता

स्वागत कर

दुगुनी प्रसन्नता

बाहों में भर

बल्लियों उछलता

 है प्रतिक्रया

कोई खेल नहीं है

बेचैनी की अस्थिर   

दशा का कोई

मेल  नहीं है

  है छोटी सी झलक

मन क्या सोचे

स्पष्ट होने लगा है

 मन मयूर

नृत्य की  प्रगति में   

बढा के थिरकन

खुशी में धड़कन

वृद्धि हुई है |

आशा

                    

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