28 अप्रैल, 2011

वह तो एक खिलौना थी



उसने एक गुनाह किया
जो तुम से प्यार किया
उसकी वफा का नतीजा
यही होगा सब को पता था |
जाने वह ही कैसे अनजान रह गयी
तुम्हें जान नहीं पाई
यदि जान भी लेती तो क्या होता
प्यार के पैर तो होते नहीं
जो वह बापिस आ जाता |
उसके तो पंख थे
वह दूर तक उड़ता गया
लाख चाहा रोकना पर
इतना आगे निकल गया था
लौट नहीं पाया |
उसका रंग भी ऐसा चढ़ा
उतर नहीं पाया
बदले में उसने क्या पाया
बस दलदल ही नजर आया |
बदनामी से बच ना सकी
उसकी भरपाई भी सम्भव ना थी
अब तो नफरत भरी निगाहें ही
उसका पीछा करती रहती हैं |
पर तुम्हें क्या फर्क पड़ता है
तुम तो वफा का
अर्थ ही नहीं जानते
होता है प्यार क्या कैसे समझोगे |
वह तो एक खिलौना थी
चाहे जब उससे खेला
मन भरते ही फेंक दिया
जानते हो क्या खोया उसने
आत्म सम्मान जो कभी
सब से प्यारा था उसे |

आशा