27 जनवरी, 2018

कतरनें



१-इन्द्रधनुषी
सात रगों से सजी
सृष्टि हमारी

 २-हरी धरती
नीला है आसमान
अद्भुत संगम

3-विभिन्न  रंग
दिखाते सौन्दर्य का
संजोग होता

4-सात  रंगों की
छटा निराली होती
किसी कृति की

५-शिक्षित बेटी
सँवारे परिवार
लाए समृद्धि

६ -सुर न ताल
है केवल धमाल
कर्ण कटु है

७-लगाएं पौधे
हरियाली बढ़ती
मन मोहती

८-सत्य की खोज
कहाँ है असंभव
भक्तों के लिए

९-कहीं न मिले
धरा और गगन
दीखते साथ

१०-सूखी पहाड़ी
छोटी सी है तलैया
घन गरजे

11-उमंग भरी
है मन की साधना
सबसे खरी


आशा

24 जनवरी, 2018

मैं भीग भीग जाती हूँ



बिना मौसम बरसात के
जब बादल छा जाते हैं
जब भी फुहार आती है     
मैं भीग भीग जाती हूँ 
मन से भी तन से भी 
कितना भी ख्याल रखूं 
बच नहीं पाती 
जाने कहाँ से विचार आते हैं 
मन से टकरा कर चले जाते हैं 
न जाने क्यों बैर है मुझसे 
न आने की खबर देते हैं 
न जाने की सूचना 
बस मन की वीणा के 
तार छेड़ जाते हैं |
आशा
  







22 जनवरी, 2018

वसंत पंचमीं






वसंत ऋतू के आगमन ने
 किया आग़ाज
अपने आने का
चुराई मौसम से कुछ ऊर्जा
सुहाना उसे बनाने के लिए
है आज वसंत पंचमी
धरती पीली हुई
 पीले पुष्पों से सजी 
हे वाग देवी सरस्वती
 तेरे स्वागत में 
बच्चों ने पीत वसन 
 धारण किये 
मीठे चावल बनाया 
 भोग के लिए 
देना झोली भर
विद्या का दान 
आशीष भरा  हाथ 
सर पर सदा रखना 
मां सरस्वती तुम्हें 
शत शत नमन |
आशा

सरल सहज सजीले शब्द

  सुलभ सहज सजीले शब्द जब करते अनहद नाद मन चंचल करते जाते अनोखा सुकून दे जाते कर जाते उसे निहाल | प्रीत की रीत निभा दिल से   जीने...