08 मार्च, 2024

वसंत पंचमी

 आया मोसम वसंत  का 

हर ओर हरियाली छाई 

खिले फूल पीले धरा  पर 

रंगीन हुआ प्रकृती का रंग 

मन हर्षित हुआ झूमा

गीत गाए खुश होकर 

यही भाव कविता में भरे 

सभी की पोशाको में झलके 

हुआ रंगीन समा वासंती चारों ओर

वाग देवी का  पूजा अर्चना किया 

मनाई वसंत पंचमीं

पीले मीठे भात से 


आशा सक्सेन


तुलना दौनों की

 

इन सारी हरकतों का 

बेमतलब की तांका झाकी का 

कोई अर्थ नहीं 

ये सब को रास न  आती

मन को जब रास न आए

जिन्दगी ही रूठ जाए |

सही राह मिलते ही

जीवन सही पटरी पर

नहीं चाहता 

जाने के लिए अपना मन बनाए

इघर उधर झांकते

सारा जीवन बीत गया है

यूँही इधर उधर झांकते

कोई हल नहीं निकला

सितारा देखा जब भी

तुम से किसी की तुलना नहीं हो पाई |

तुम चाँद और तारे आसपास तुम्हारे

तुम सा कोई नहीं आकाश गंगा में

जैसे भी हो सब से अलग हो 

 हो सारे आसमान में |

बड़ी सफलता पाई इसरो  ने

तुम पर भारत का तिरंगा झंडा फैला कर

प्रधान मंत्री मोदी ने भी की दिल से  प्रशंसा

यहाँ की  प्रगति देख कर |

आशा सक्सेना

07 मार्च, 2024

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस

 हूँ आज की आधुनिक महिला 

कर्मठ हूँ और सजग

 किसी से कम नहीं 

 सभी कार्य कर सकती हूँ |

किसी पर आश्ररित नहीं  हूँ

 अपने बलपर  खडी हूँ 

मुझसे  कोई  जीत नहीं सकता 

किसी की कोई जरूरत नहीं मुझको 

हर वर्ष अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस  आता  है 

महिलाओं को सन्मानित किया जाता है 

मुझे भला लगता है |

 मैं अपने कर्तब्य का पालन करती  हूँ 

मन से कार्य करना करती हूँ 

किसी कार्य से पीछे नही हटती 

जब मुछे प्रसंशा मिलती

सबको धन्यवाद   करती |


आशा सक्सेना

जीवन क्या चाहे

 

इन सारी हरकतों का |

बेमतलब की तांका झाकी

सब को रास न  आती

मन को जब रास न आए

जिन्दगी ही रूठ जाए |

सही राह मिलते ही

जीवन सही पटरी पर आना नहीं चाहता 

जाने के लिए अपना मन बनाए

इघर उधर झांकते

सारा जीवन बीत गया है

यूँही इधर उधर झांकते

कोई हल नहीं निकला

सितारा देखा जब भी

तुम से किसी की तुलना नहीं हो पाई |

तुम चाँद और तारे आसपास तुम्हारे

तुम सा कोई नहीं आकाश गंगा में

जैसे भी हो सब से अलग हो 

 हो सारे आसमान में |

बड़ी सफलता पाई इसरो  ने

तुम पर भारत का तिरंगा झंडा फैला कर

मोदी जी ने भी  की प्रशंसा

यहाँ की  प्रगति देख कर |

आशा सक्सेना

आया वसंत

 

 हुआ मौसम रंगीन सुहाना 

खिले फूल धरती पर पीले पीले 

रति पती ने घूमने का मन बनाया 

सारा माहोल बदला हुआ वासंती |

शिवजी का मन हुआ अनंग

हर ओर  प्रकृति में रंगीनी छाई 

खुशहाल मौसम ने जीवन ने ली अंगडाई 

 

06 मार्च, 2024

 

जिन्दगी ने कितने रूप बदले

 

जिदगी  ने  कितने रूप बदले

अपने अस्तित्व को सजाने के लिए  

अपने मन को उस जैसा बनाने के लिए 

जिदगी  ने  कितने रूप बदले

अपने अस्तित्व को सजाने के लिए  

अपने मन को उस जैसा बनाने के लिए

जिसकी चाह रही कब से पूरी करने के लिए |

बहुत ली सलाह भिन्न भिन्न लोगों से ली

कभी किसी की नक़ल कर

पर जरासा सुकून भी न मिला मन

मन का ताप कम न हो सका

अब किसी ने कहा अपने दिल की सोचो

गहराई मैं उतरो

 तभी कुछ फल हासिल कर पाओगे

है  कठिन परीक्षा की घड़ी

कठिन परीखा फल को जब भोगोगे

मनको हिमत मिलेगी

सफलता कदम चूमेंगी

आशा सक्सेना