15 मई, 2014

दो तोते


दो तोते बैठे 
 वृक्ष के तने पर 
आपस में बतियाते 
वर्तमान पर चर्चा करते |
उदासी का चोला ओढ़े 
यादे अपनी ताजा करते 
पहले कितनी हरियाली थी 
हमजोलियों की टोलियाँ थीं |
बड़े पेड़ कटते गए 
मित्र तितरबितर हो गए 
आधुनिकता की बली चढ़ गए 
मानव ही बैरी हो गया 
सृष्टि के संतुलन का |
हरियाली का नाश किया 
सीमेंट लोहे  का जंगल उगाया 
यही कारण हो गया 
हम सब की बदहाली का  |
रैन बसेरा नष्ट हो गया 
आज है यह हाल
 कल न जाने क्या होगा 
अभी बैठे हैं यहाँ 
कल न जाने कहाँ होंगे |
आशा 


14 मई, 2014

नजारा हाउस बोट का