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जून 28, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कुछ लम्हे तो चाहिए

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कुछ लम्हें तो   चाहिए   तुम्हारे   दीदार के लिए तुम्हें जानने  के लिए वह भी ऐसे कि उनमें किसी का दखल न हो | मुझे पसंद नहीं है   किसी की दखलंदाजी तुम्हारे मेरे   बीच आकर     गलतफैमी बढाने की  बातों को तूल देने की |  होगी जब आवश्यकता       कानों के कच्चे नहीं   हम खुद ही सक्षम हैं आपस में उलझा हुआ पेच सुलझाने में |   मुझे चाहिए समय   खुद सोचने दो   दूसरों की बैसाखी ले कर     कब तक चलूंगी |   दूसरों की सलाह  होगी कितनी कारगर ? है विश्वास मुझे खुद पर   कभी गलत नहीं सोचूंगी | किसी की गलत सलाह  पर कान न धरूंगी    सही निर्णय को   सिर माथे रखूंगी | आशा है सभी समस्याएं अपने आप समाप्त होंगी मेरे तुम्हारे तालमेल पर   लोग मन में ईर्ष्या करेंगे | आशा    

चौमासा

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  घिर आई काली कजरारी बदरिया   आपस में टकराए बादल चमकी चमचम  बिजुरिया   मौसम हुआ तरवतर चौमासे में  धरती ने ओढी चूनर धानी  नवयौवना सी दादुर कोयल मोर पपीहा बोले बगिया में  मयूर  ने की अगुवाई चौमासे की  अपने पैरों की थिरकन से | मयूर ने पंख पसारे झूम झूम घूम कर   नृत्य किया बागों   में  कंठ से मधुर   स्वर निकाले आकर्षक नयनाभिराम नृत्य प्रदर्शन में |    आकृष्ट किया अपनी प्रिया को     रंगबिरंगे फैले पंखों से   नयनों से  की अश्रु वर्षा भी    उसका सान्निध्य को पाने को |   छोटी बड़ी  बूदें जल की मोह रही मन को मन होता नहाए तेज बारिश के पानी में  दिल से करें  स्वागत चौमासे का | बहनों ने सोलह श्रृंगार किये हैं   भरी भरी मेंहदी सजाई है पैरों और  हाथों में पहनी है सतरंगी चूनर हाथ भर भर हरी चूड़ियाँ जल्दी बड़ी है उन्हें अपने पीहर जाने की| चौमासे के त्यौहार सारे  मन में गहरे ऐसे पैठे  एक भी छोड़ना नहीं भाता मन को    बाट जोहती बैठी हैं वे अपने भैया   के आने की चौमासे के त्योंहार सखियों के साथ  मनाने की |   ईश्वर भी आराम  चाहता है चौमासे में  बहुत थक ग

सरहदें

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 विश्व पूरा बटा है अनगिनत देशों में सरहदों ने अलग किया है एक दूसरे से सब को| अधिकाँश देशों में है तनातनी कहीं नहीं है शान्ति   बैठे है सब दहकते अंगारों पर |   अवधारणा वसुधैव कुटुम्बकम की रह गई पुस्तकों में सिमट कर   पड़ोसी देश भी भूले सद्भाव भाईचारा आनंद आपस में मिलजुल कर रहने का | सरहदों ने बांटी धरती जल और आकाश हर देश के लिए सरहद की रेखा खिची है    भूल गए हैं  कोई नहीं ले जाता एक इंच भी जमीन खुद के साथ यूं तो कहा जाता है अच्छे सम्बन्ध होने पर पड़ोसी ही सबसे पहले काम आते हैं|   हर समय होते हैं मददगार पर अब ऐसा प्रतीत   नहीं   होता अब    छोटे से जमीन के टुकड़ों के लिए आपसी   सम्बन्ध भूल कर मरने मारने को तत्पर रहते सदा पड़ोसी देश | कितना खून खराबा होता है सरहद पर सीमा सुरक्षा में दिन रात जुटे रहते शूरवीर अनेक  अपनी सरहद को महफूज रखने के लिए   कठिन परिस्थितियों में भी रहरे तत्पर| देश   को परतंत्र होने से   बचाने के लिए अपनी जान तक को दाव पर लगा देते हैं उनका है एक ही लक्ष्य देश हित है सर्वोपरी   बहुत गर्व होता है देश को उन शूरवीरों   पर