28 दिसंबर, 2019

नव वर्ष

नववर्ष पर हार्दिक शुभ कामनाएं -
पलक झपकते ही समय बीता
पूरा साल कहाँ खो गया
मालूम न पड़ा
पर एक बात हुई अवश्य
घटना क्रम इतना तेजी से घटा
तन  मन सिहर उठा सर से पाँव तक
पहले अति वृष्टि बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदाएं
 हिंसा और आगजानी ने पार की सीमा
थमीं वे  बहुत कठिनाई से
अब जा कर समस्याओं में गति अवरोध
प्रारम्भ हुआ है फिर भी
 पूर्ण शान्ति न आ पाई
अब मौसम कहर ढा रहा है
 सर्दी ने अति की है
सूर्य देवता जा छिपे कोहरे की चादर  में
 दर्शन दुर्लभ हुए हैं
सर्द मौसम  ने त्राहि त्राही मचाई
जन जीवन हुआ अस्तव्यस्त
 नववर्ष तुम्हारे स्वागत के लिए
 उत्साह फिर भी कम नहीं हुआ है
धीरे से  उत्साह जगा जीवन में
आने वाले कल के स्वागत में
कई गीतों की की है तैयारी
आयोजन बड़े जश्न का करने को मन है
उसी में जुटे हुए हैं
 जब होगा स्वागत तुम्हारा  धूमधाम से
  खुशहाली लिए होगा  आगमन तुम्हारा
सुख शान्ति बरसेगी चहु ओर
नया साल नई उपलब्धियां ले कर आए
 भाई चारे के साथ नया दिन मनाएं
 है यही कामना प्रभू से | 
आशा 

27 दिसंबर, 2019

औकात







कभी अपने अन्दर झांका नहीं
चले  दूसरों  को नसीहत देने
उनको उनकी औकात दिखाने
यह है कैसी दोहरी मानसिकता तुम्हारी ?
पहले अपने अन्दर झांको
फिर दूसरों पर उंगली उठाओ
नहीं तो गलत मिसाल कायम होगी
तुमने अपने अन्दर क्या छिपाया
कोई जान न पायेगा 
है बहुत सरल दूसरों पर उंगली दिखाना
यह भी तो जानो,ध्यान दो
है एक उंगली बाहर जब
बाक़ी तुम्हारीओर इंगित करती हैं
बंद मुट्ठी में अपना अंगूठा देखो
किधर? क्या दिखा रहा है ?
तुम्हारा सच दर्पण उगलेगा
तुम उससे मुंह मोड़ न पाओगे
वही तुम्हें असाली  औकात दिखाएगा
जब भी तुम दर्पण में देखोगे
मेरी निगाहें तुम्हारा पीछा करेंगी
आवाज तुम्हारे कानों में गूंजेगी
उसे देख कर याद आएगा  
मेरा कहा एक एक शब्द
मैंने तुम्हें कितना समझाया था
मैंने भी क्या कुछ नहीं कहा था तुमसे
पर तुमने कभी कुछ सोचा नहीं
अपनी जिद पर अड़े रहे सदा 
जैसे मैंने कुछ कहा ही नहीं |


आशा 

23 दिसंबर, 2019

विकास शील देश

 
आए दिन की आगजनी
पत्थरबाजी और तोड़ फोड़
है किसकी सलाह पर
कोई आगे पीछे नहीं देखता
ना ही सोच उभर कर आता
इससे क्या लाभ मिलेगा ?
क्या होगा लाभ जन धन हानि का ?
नेता लोग  अपनी अपनी रोटी सेक रहे 
सामान्यजन को क्या होगा लाभ 
कोई नहीं सोचता इस पर
क्या देश ऐसे ही आगे बढेगा
नया भारत ऐसे तो नहीं सम्हलेगा
कैसे  प्रगतिशील कहलाएगा |
केवल विरोध  से कोई हल न निकलेगा
इसके लिए प्रयत्न सभी को करने होंगे
क्या केवल सरकार ही कुछ करे ?
आम जनता का कोई दाइत्व नहीं
यही भूल सदा करते आए
अब तक खुद के अन्दर झाँक नहीं पाए |
तभी तो किसी न किसी बात पर
बबाल  होता रहता है
ज़रा सी  हालत सुधर जाने पर
कोई नया मुद्दा जन्म ले लेता है |
आशा

सरल सहज सजीले शब्द

  सुलभ सहज सजीले शब्द जब करते अनहद नाद मन चंचल करते जाते अनोखा सुकून दे जाते कर जाते उसे निहाल | प्रीत की रीत निभा दिल से   जीने...