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जनवरी 20, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ऊष्मा प्यार की

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रात कितनी भी स्याह क्यूँ न हो  चाँद की उजास कम नहीं होती  प्यार कितना भी कम से कमतर हो  उसकी  मिठास कम नहीं होती  कितना प्यार किया तुझको  यह तक नहीं जता पाया  तेरे वादों पर ऐतवार किया जब  भी चाह ने करवट ली चाँद  बहुत दूर नजर आया यही  बात मुझे सालती है  आखिर  मैंने क्यूँ प्यार किया  वादों  पर क्यूँ ऐतवार किया कहीं कमीं प्यार में तो नहीं   जो तू इतना  बदल गयी  तनिक भी होती ऊष्मा  यदि हमारे  प्यार में तू भी उसे महसूस करती यह दिन नहीं देखना पड़ता   प्यार से भरोसा न उठता | आशा

गणतंत्र दिवस

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हुए स्वतंत्र सन सैतालिस में सन पचास में गणतंत्र बना स्वतंत्र देश में पालनार्थ संविधान लागू हुआ | वह दिन था छ्ब्बीस जनवरी   इस दिन को याद किया जाता है जश्न मनाया जाता है तिरंगा फहराया जाता है | हम मनाते हर वर्ष गणतंत्र  दिवस उत्साह से देश भक्ति के गीत गाते झंडा फहराते बड़ी शान से | सेना के तीनों अंग दिल्ली में गुजरते मंच के सामने से सलामी तिरंगे को देते सर उठा अभिमान से | कदम से कदम मिला कर चलते देश भक्ति के गीत गाते तत्पर दिखते रणबाकुरे देश हित में आहुत्तीके लिए | झांकियां विविध प्रदेशों की इस उत्सव में भाग लेतीं नयनाभिराम दृश्य होते कुछ न कुछ सन्देश देते | स्कूली बच्चे छोटे बड़े तरह तरह के करतब करते नाचते थिरकते गुजरते तिरंगे को प्रणाम करते | हम स्वतंत्र देश के वासी  रक्षा  करते इसकी  हो अजर अमर गणतंत्र हमारा  यही कामना रहती | देश हमारा सबसे प्यारा  सारे जग से न्यारा   गर्व से सर उन्नत होता जान कर कर्तव्य हमारा | आशा