13 मई, 2023

मन चाहे कितनी भी मनमानी करे






                                                                    मन चाहे कितनी भी

 मनमानी करे 

जीते हारे अपने विचारों में 

यह कोई अच्छी बात नहीं |

समाज में रहने से 

उसके अनुकूल चलने से 

कुछ तो सीखने को मिलता है |

कोई फैक  नहीं देता 

अपने विचारों को कुछ तो

समाज  मान्यता देता है 

धीरे धीरे प्रगति की और 

अपने आप  कदम  

बढ़ने लगते हैं

 यही क्या कम है|

आशा सक्सेना 

12 मई, 2023

किसी को मत तोलो एक ही तराजू से


 किसी को मत तोलो  एक ही तराजू ने 

सब का स्वभाव कभी एक सा नहीं होता 

कभी दो लोग सामान नहीं होते

 इस लिए भी उनके आचार विचार होतेहैं भिन्न |

उनको कितना भी तराशा जाए

 कभी पूर्ण  हो ही नही पाते 

जो चाहिए वे गुण उसके व्यक्तित्व में

 आ ही नहीं सकते  जिससे की जा सके कोई उम्मीद 

|मन को बहुत पीड़ा होती है उसके व्यबहार  से 

क्या सोचा था और क्या पाया 

अब जान लिया है इसी लिए 

अपने विचार को नियंत्रण  में रखा है |

आशा सक्सेन

09 मई, 2023

है कितनी समानता दौनों में


 है कितनी समानता दोनों में 

 कभी सोच कर देखना 

उसमें तुममे है यह भी विचार करना 

तभी दौनों में इतनी पटती है |

उसे आडम्बर रास नहीं आता 

मन में दिखावा चोट पहुंचाता 

तुम भी उससे कम  नहीं हो  

छोटी बातों पर बुरा मानते हो  |

तुम भी ऐसा ही व्यबहार करते हो 

जैसा अपना सम्बब्ध होगा 

वैसा ही व्यवहार दूसरे से होगा |

 हालाकि मन तो दुखेगा|पर क्या करें 

|ईश्वर ने नजाने क्या सोच कर 

दौनों की जोड़ी बनाई है 

तब भी जब दौनों में तकरार होती है  |

सुलह के लिए बड़ों की जरूरत होती है 

यही बात मुझे बेचैन करती है 

मेरे मन का संतुलन डगमगाती है 

मुझे किसी बात का कष्ट होता है 

यह भी किसी से बाट नहीं सकती 

मैं क्या करूं किससे कहूँ |

आशा सक्सेना 


08 मई, 2023

आवश्यकता आत्म निर्भरता की

 ना किसी से कुछ चाहा 

यदि किसी से प्राप्त हुआ भी

 मन से ना  स्वीकारा 

मन में रहा गुप्त हो कर |

 किसी से सहायता की 

है क्या आवश्यकता 

यही सिखाया बच्चों को 

किसी की दया के पात्र ना बनो 

अपना आत्म बल तोलो

 उसी का उपयोग करो |

मेरा मन कहता  है 

तुम कभी ना  हारोगे 

यही टिप तुम्हारे काम आएगे 

तुम्हारा जीवन सवारेगे |

आशा सक्सेना 

07 मई, 2023

कमल कामिनी


                                                          नाजुक  कमनीय  दिखती 

मन से  सुन्दर है 

तन से ही सुन्दर नहीं 

कमल के फूल सी हो |

दलदल  में खिलती 

पर ज़रा भी मिट्टी में

 लिपटी  नहीं  होती 

यही विशेषता है उसकी |

हर बार सबको

 बहुत पसंद आती है 

उसकी सुन्दरता है अनमोल 

आम पुष्पों से भिन्न  |

क्या फ़ायदा उसे तोड़ने मैं 

बेजान गुलदस्ते में सजाने  में 

 वह  तो डाली पर ही शोभा देती है 

यहीं सजी सजाई अनमोल दिखती है|

आशा सक्सेना