15 अगस्त, 2013

वारिद









 वारिद जल से भरा ,डोल रहा चहु ओर |
होगी जाने कब वर्षा ,अब कोइ ना ठौर  ||

बरस बरस वारिद  थका ,चाहता अब विश्राम |
यूं तो दामिनी दमकी ,पर आई ना काम  ||

हरी भरी धरती हुई ,खुशियों का है दौर |
किससे क्या आशा करें ,क्यूं कर रुके अब और  ||

जाने का होता मन ना ,आँसू भर भर रोय |
नदी तड़ाग उफन रहे ,सीमा अपनी खोय ||

जाने का मन बना लिया ,आने का वादा ले |
लगता असंभव रुकना ,यूं रिसती आँखों से ||

12 अगस्त, 2013

वीर सपूत

रहा एक ध्येय तेरा 
अपनी सरहद की रक्षा करना
 है नमन तुझको
जीवन देश हित उत्सर्ग किया |
है धन्य  वह माँ
जिसने तुझे जन्म दिया 
देश हित में जीने की 
दी अद्भुद शिक्षा  |
 घुसपेठ होते ही तूने
जी जान से की  रक्षा 
 निजी स्वार्थ न आड़े आए
रक्षा ही  ध्यान रही  |
  सस्ती नहीं  तेरी कुर्वानी
मूक नहीं तेरी वाणी
है देश तेरा ऋणी
है सच्चा सपूत तू   |
देश हुआ जागृत
केवल विरोध काफी नहीं
कडा कदम उठाना होगा
देश की रक्षा के लिए
मुंह तोड़ जवाब देना होगा
तेरा कर्ज चुकाने के लिए|
तू ना ही  कोई  सेवक
ना ही बली का बकरा
देश हित के लिए जिया
उसी हेतु बलिदान दिया
हे देश के रक्षक वीर सपूत
तुझे शत शत  नमन |

आशा |

सरल सहज सजीले शब्द

  सुलभ सहज सजीले शब्द जब करते अनहद नाद मन चंचल करते जाते अनोखा सुकून दे जाते कर जाते उसे निहाल | प्रीत की रीत निभा दिल से   जीने...