01 अप्रैल, 2020

ख्याल



ख्याल क्यूँ सो गए स्वप्नों में क्यूँ हुए नाराज   
याद न आए कभी  अपनों की छाया तक  में
कभी भूले से मन में भी टिक जाया करो
इस तरह हमें न सताया करो
क्या भूल हुई हमसे ?
क्यूँ  इस तरह  नजरअंदाज किया
किसी ने न खबर ली हमारी  
जीवन में पहले ही से गम कम  न थे
क्या कारण हुआ और उन्हें बढ़ा चढ़ा  फैलाने  का
रोने को बाक़ी   जिन्दगी बहुत  है
कुछ पल तो दिए होते हंसने  मुस्कुराने को
ख्यालों क्या यह गलत नहीं है
मुझसे मेरा सुख क्यूँ छीन लिया तुमने  
मुझ से यह दूरी कैसी कारण तो बताया  होता
किस बात के लिए की  है उपेक्षा मेरी
यदि  अपनी त्रुटि जान पाती
 कोई  अपेक्षा न करती तुमसे भी  
 अपने गलत सोच को दर किनारे करती
 तुम्हें उलाहना  कभी न देती
मुझे ख्यालों में दिन रात जीना बहुत प्रिय है
 तुम कैसे भूले? क्या है यह अन्याय नहीं
तुमने स्वप्नों में भी  आना छोड़ दिया
मेरे प्यार का क्या  अंजाम  दिया |

                                 आशा

31 मार्च, 2020

हईकू(कोरोना)





   





१-कोरोना भय
जान सांसत में है
बक्त ना कटे

२-लौक डाउन
से हुआ बड़ा फर्क
जीवन बचा

३-कोरोना से है
जान का भय नहीं
गरीबी मारे

४-मजबूरी में
मजदूर चला है
नियम तोड़ 

५-कब काटेंगे 
सामजिक दूरी के 
इक्कीस दिन
                                                                               आशा

पलाश



  बसंत ऋतु को कर विदा 
पतझड़ ने डेरा डाला
पत्ते पीले हो झड़ने लगे
फिर भी कुछ पौधों पर 
हरी हरी कलियों में से 
झांक रहे केशरिया पुष्प  
हाथों से यदि छू लिये  
हाथ पीले हो जाते  
अभी भी  स्रोत यही हैं
देहातों में केशरिया रंग के     
 घर पर इनसे ही रंग बना कर 
होली पर खेलते रंग 
प्रियतमा के संग 
हो जाते अनंग
 खुशीयों में रम के
फूलों की होली के
 हैं ये प्रमुख हमजोली 
ये  होते बहुत उपयोगी  
दवा में उपयोग किये जाते 
श्वेत पुष्प पलाश के 
तंत्र मन्त्र साधना में 
काली शक्तियों को दूर करने में
पाते सफलता साधक
  केशरिया श्वेत पुष्पों के उपयोग से  |
आशा