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जून 5, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हाईकू

१- सुख मन का अब आए कहँ से दुखी दुनिया | २- वीरान क्षेत्र सुनसान सडकें कुम्भ समाप्त | ३- सर्पिलाकार जीवन की डगर चला जाए ना | ४- यह जिन्दगी सेज नहीं फूलों की है काटों भरी | ५- नया खिवैया नौका मझधार में पार लगे ना | ६- उनका दुःख अपना लगता है हम साया हैं | आशा

तेवर

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ना दिखा तेवर अपने क्या हम ही मिले थे सबसे पहले तेरी नाराजगी ज़रा सी बात पर शराफ़त तक भूली लाल पीली होने लगी बिना बात की बात पर यह कैसा व्यबहार तेरा संयम अपना खो कर सारी हदें पार कर बातों को तूल देने लगती हर वक्त की किचकिच यह नाराजगी घर को घर न रहने देती मन संतप्त कर देती हमें तो प्यारी लगती है मुस्कान भरी चितवन तेरी आगे से तेवर अपने न दिखाना मुझ को प्यार भरे दिल की सौगात ही बहुत है मेरे लिए | आशा

ये पांच दिन

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गिन गिन दिन चिंता बढी कारण समझ न पाई दो दिन पूर्व ही आने को थे ना आए क्या बात हुई कल भी पूरा दिन बीता रात बिताई तारे गिन गिन दो से चार चार से आठ अनगिनत तारों का संगठन गिनना लगा असंभव किये नेत्र बंद पर  निंद्रा से कोसों दूर तुम ही तुम नजर आए अचानक धन गरजे  बिजली कड़की आंधी चली वृष्टि हुई अधिक बेचैन कर गई फोन पर तुमने कहा  फँस गया हूँ कार्य में पांच दिन न आ सकूंगा कुछ राहत मन को मिली फिर भी हूँ परेशान कैसे कटें ये पांच दिन तुम्हारे बिन | आशा आशा