Akanksha -asha blog spot.com

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24 मई, 2014

ए वादेसवा (हाइकू)


(१) 
 ए वादेसवा 
जाना उस देश में 
जहां हो प्रिया|
(२)
 नम  अधर 
ओसमय वदन 
लगते  मदिर |
(३)
खिचती  रेखा
उन  दौनों के बीच 
बढती दूरी |
(४)
ए मीत  मेरे 
है  यह रीत नहीं 
तुम न आए |
(५)
जलते पैर 
धूप है हरजाई
 जाने न दे |
(६)
नैन  रसीले 
नटखट कान्हा के 
भरमा गए |
(७)
परिवर्तन  
लोगों के विचारों में 
अमन लाए |
आशा 









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22 मई, 2014

रिश्ते का सत्य


जल में घुली चीनी की तरह
कभी एक रस ना हो पाए
साथ साथ न चल पाए
तब कैसे देदूं नाम कोई  
ऐसे अनाम रिश्ते को |
जल में मिठास आ जाती है
चीनी के चंद कणों से
होती है हकीकत दिखावा नहीं
पर स्थिति विपरीत यहाँ
रिश्ता बहुत सुदृढ़ दीखता
पर खोखला अंदर से |
दौनों में कितना अंतर है
पर जीवन का सत्य यही है
मतलब के सारे रिश्ते हैं
छलना का रूप लिए हैं |
क्षणभर के लिए बहकाते हैं
वास्तविक नजर आते हैं
तभी विचार आता है
क्या रिश्तों का सत्य यही है |
आशा

20 मई, 2014

ये चंद लकीरें


hand
बनी हर हाथ में
ये चंद लकीरें
रहती सदा उत्सुक
बहुत कुछ कहने को
पर सुनने वाला तो हो |
जीवन का पूरा चिट्ठा
लिखा विधाता ने इनमें
पर सही पढने वाला
कोई  तो हो |
जब कोइ हादसा हो
या कोइ समस्या हो
होती क्षमता इनमें
सतर्क करने की
जो हस्त रेखा पढ़ पाए
रेखाएं  मस्तिष्क की समझ पाए
जानकार ऐसा तो हो |
कुछ अध्यन करते
सत्य  बताते
पर  तकदीर की लकीरों पर
विश्वास  तो हो |
आशा

18 मई, 2014

माँ (हाईकू )

११.५.२०१४
मेरी जननी 
प्रिय जान से मुझे
जैसे अवनी |

प्रथम गुरू
हो सुबह मेरी माँ
तुझसे शुरू |

माँ का आँचल
भरा है ममता से
रिक्त न होता |
आशा