21 सितंबर, 2018

मजबूरी




बचपन खेल रहा है
बचपन की गोद में
 नव वस्त्र  धारण किये है
पुराने उतरन समझ कर
दे दिए है दान में |
पर तुझे तो यही
नियामत लगते है
तन तो ढक  जाता है
बचाव हो जाता  है इनसे
 मौसम की मार से |
पेट तो भर ही जाता है
दिए गए टुकड़ों से |
पर क्या करें मजबूती है
मजदूरी भी जरूरी है
धर चलाने के लिए
मन पर नियंत्रण रख
सभी कुछ सहना पड़ता है
बाह री तकदीर
किससे शिकायत करें |

आशा


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