26 दिसंबर, 2015

लम्बी सड़क सा जीवन



प्रातः काल सुनहरी धूप
लम्बी सड़क दूर तक 
दे रही कुछ सीख 
तनिक सोच कर देखो |
आच्छादित वह   दीखती
हरेभरे कतारबद्ध वृक्षों से
बनती मिटती छयाओं से
उनके अद्भुद आकारों से |
बाल सूर्य की किरणे अनूप
छनछन कर आती धूप
वृक्षों की टहनियों को छू कर
करती आल्हादित तन मन |
निमंत्रित करतीं वहां आने को
मन बावरे को सवारने  को 
एक खिचाव सा होता 
अजीब लगाव सा होता |
फिर से पहुँच जाती
 कल्पना जगत में 
खो जाती सुरम्य वादी की
 उन रंगीनियों में |
कभी लम्बी कभी छोटी
 छाया वृक्षों की  
देती संकेत
 विविधता पूर्ण  जीवन की |
कहीं ऊंची कहीं नीची सड़क
 दिखाती जिन्दगी में
आते उतार चढ़ावों   को  

जीवन के संघर्षों को  |
प्रकृति के कण कण से यहाँ
मिलती रहती   शिक्षा हर पल
इस क्षण को जी भर कर जी लो
कल की किसको खबर
आशा