20 जून, 2018

जीवन एक लकीर सा



जीवन ने बहुत कुछ सिखाया
पर आत्मसात करने में
 बहुत देर हो गयी
हुए अनुभव कई
कुछ सुखद तो कुछ दुखद
पर समझने में
 बहुत देर हो गयी
साथ निभाया किसी ने
कोई  मझधार में ही छोड़ चला
सच्चा हमकदम  न मिला
लगा जीवन एक लकीर सा
जिस पर लोग चलते जाते
लीक से हटाना नहीं चाहते
रास्ता कभी सीधा तो कभी
टेढ़ी मेढ़ी  पगडंडी सा
 सांस खुली हवा में लेते
कभी घुटन तंग गलियों की सहते
दृष्टिकोंण फिर भी सबका
एकसा नहीं होता
दृश्य वही होता
पर प्रतिक्रियाएँ भिन्न सब की
लेते दृश्य उसी रूप में
जो मन स्वीकार कर पाता
लकीर जिंदगी की
कहाँ से हुई प्रारम्भ
और कहां  तक जाएगी
जान नहीं पाया
है छोर कहाँ उसका
समझ नहीं पाया 
है नितांत अकेला 
हम कदम कोई न मिला |
                                                                                                                                                                                     

18 जून, 2018

यह क्या किया ?








हकीकत से कब तक दूरी
उससे मुंह मोड़ा
क्या यह है  सही ?
अंतर मन से सोचना फिर कहना
है यह कहाँ की ईमानदारी
जब मन चाहा खेला  
फिर उससे मुंह फेरा
जिन्दगी के चार दिन
उस पर लुटाए
 बाद में मन भर गया
 तब लौट कर न देखा
फटे पुराने कपड़े की तरह
उसका मोल किया
हकीकत तो यह है कि
 तुमने उसे  कभी चाहा ही नहीं
उसको दूध की मक्खी समझा
उसका केवल उपभोग किया
हो तुम कितने कठोर
कभी सोचा भी न था
 हकीकत को तो नहीं झुटला सकते
 पर तुमसे मन की
 दूरी जरूर हो गई है
यह तुमने क्या किया ?  



16 जून, 2018

हाईकू

१-जल बतासा 
चहरे पर खुशी
 दिखाई देती 

२-बरसात में 
हुआ मौसम ठंडा 
मन प्रसन्न 

३-नभ तरसा 
तरसे सरोबर 
जल के लिए 

४- देखते नभ 
काले भूरे बादल 
वृष्टि आजाओ 

५-आशा निराशा 
दोनो हैं सहोदर 
जीवन गीत 

६-क्या लिख दिया
क्या न लिख दिया है
सोच के देखो

आशा

12 जून, 2018

मोती अनमोल

सागर में सीपी के लिए चित्र परिणाम
सागर की सीपी  में मोती
हैं अनमोल अद्भुद दिखाई देते 
है भण्डार अपार  उनका 
उनसे शब्द मोती से झरते
किये संचित शब्दों के मोती 
चुन चुन मोती माला पिरोई 
उस पर सुगंध भावों की डाली 
वही  माला अपने प्रियवर को 
बड़े जतन से   भेट चढ़ाई 
जब उनहोंने  उसे धारण किया 
भाव भरे शब्दों को पहचाना 
सच्चे मोतियों  को परखा 
उनकी आव का अनुभव किया
उन्हें यथोचित स्थान दे कर  
मनोबल मेरा  बढ़ाया
शब्दों में संचित  भावनाएं 
दौनों के बीच सेतु बन गईं 
अपने अनुभव बांटने  के लिए
शब्दों की धरोहर मिल गई |
आशा

क्यों रूठना

 

छोडो यह बचकानी हरकतें 
कभी तो गंभीरता लाओ चेहरे पर 
जो बार बार करोगे गलतियाँ 
रूठ जाएंगे सभी तुमसे 
चाहे कितनी भी मनुहार करोगे 
मना न पाओगे उनको 
दो चार दिन ही रुसवाइयां 
शोभा देती हैं न खींचो बात को 
न छीनों सब की खुशियाँ |
आशा

09 जून, 2018

जी हजूरी है आज बहुत जरूरी






जब से नौकरी लगी है
आफ़िस तो देखा नहीं
बंगले पर हूँ तैनात
क्या करूं
जी हजूरी आजकल बेहद
जरूरी हो गई है
यदि स्थाई होना हो तो
ऐसी सेवा है आवश्यक
साहब से पहले बाई साहब का
हर हुकुम मानना पड़ता है
तभी फाइल स्थाई होने की
आगे बढ़ पाती है 
तब गर्व से कह पाते हैं
हम स्थाई हो गए
जी हजूरी आजकल है बहुत जरुरी
अब पहले से भारी हो गए हैं
लोग पहले  हम से पूंछते हैं
साहब का मूड कैसा है
आज मिलें या कल |
जो आते हैं मुट्ठी गर्म कर जाते हैं
|कहते हैं यह रिश्वात नहीं
है एक छोटा सा नजराना
नन्हें मुन्ने बच्चों के लिए
और यह तुम्हारे लिये टिप
है अब चलन ऐसा ही |
आशा


















































06 जून, 2018

दहलीज


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कभी भी कहीं भी
जब कदम घर से बाहर
 निकलते  नए परिवेश में
जाने की तैयारी में
दी जाती हिदायतें बारम्बार
 यही कहा जाता
हम तुम्हारे भले के 
लिए कह रहे हैं
  जानते हैं तुम्हें 
अच्छी नहीं लगती रोक टोक
 पर समाज से बंधे हैं
 जिसने बनाया उन्हें 
 ये बनाए गए हैं 
  समाज में विचरण के  लिए
 सफल जीवन जीने के लिए
लड़कों को कम टोका  जाता
पर बेटियों की  खैर नहीं
भूले से यदि दरवाजे पर 
  खड़ी हो  बतियातीं
घर में भूचाल आ जाता
उदाहरण बहुत सटीक होते
सीता ने की पार लक्ष्मण रेखा
भोगना पड़ा 
अत्याचार रावण का
अब तो है कलियुग
 समय पहले सा नहीं रहा
दहलीज लांघने के पहले   
 सीमा पार करने के 
पहले सोच लें दस बार
नतीजा क्या होगा ?
 बनाए गए नियम
 किस हद तक हैं सही
 जानना है आवश्यक
 है यह सही  सोच 
समझ का  परिणाम
जब कदम उठाएं
सोच विचार कर
दहलीज पार कर आगे बढ़ें
दहलीज पार करने के पहले
  जान लें अच्छे बुरे
 कार्यों के परिणाम
उनका प्रभाव कैसा होगा? 
जीवन में सफलता की 
 कुंजी है यही |
आशा