23 मार्च, 2019

वसंत पंचमी



आई वसंत ऋतू
 सर्दी को देती विदाई
 तन मन में हर्ष भरती
 फूली सरसों पीली पीली
लेकर आई  वासंती बयार
मौसम परिवर्तन का करती आगाज |
धरती ने किया नव श्रृंगार
पीत वसन धारण किये
लहलहाते सरसों के पौधे
संग लिए भीनी सी  खुशबू |
सभी जन पीले वस्त्र धारण कर
होने लगे तैयार वसंत पंचमी पर  
मन में हर्ष मां सरस्वती के स्वागत का 
 थाल सजाया पूजन अर्चन  को |
हल्दी कुमकुम चन्दन के संग
पीले पुष्पों से बनाई माला
माँ सरस्वती के   अर्पण को |
  देवी को नमन करने को 
 श्वेत वस्त्र धारणी  के चरणों में
केशरिया भात और मिष्ठान
 बनाए भोग के लिए
 शीश झुका कर प्रणाम कर
 माँगा वरदान मां सरस्वती से |
शिक्षा के क्षेत्र में सफल होने को  
 विध्या दायनी श्वेत वसना
 कमलासनी माँ सरस्वती को |
आशा












20 मार्च, 2019

फागुन आया है







कान्हां संग राधा  खेलें फाग
 फागुन आया है 
यादों की सौगात लिए
आया महीना फागुन का
रंगों में सराबोर होने का
आपस में प्यार बाटने का
रंग गुलाल लिए हाथों में
बच्चे ले पिचकारी आए
मनुहार की लगवालो रंग
न माने की बरजोरी
यूँ तो रंग से डर लगता है
पर रहता इन्तजार मनुहार का
अपनों का स्नेह पाने का
पर बहुत खालीपन है
किसी की याद कर के
इन्तजार रहा करता था
 रंगों की होली का
गुजिया पपड़ी खाने का
एक साथ मिल कर
वे दिन बीते कल की बात हो गए
जाने कहाँ खो गए
बस यादों में बस कर रह गए |
आशा




18 मार्च, 2019

होली( हाईकू )





१- रंग रंगीली
होली आ गई है
प्रेम से रंगों
२-फूलों की होली
खेली बनवारी ने
राधा के संग
३-विरही मन
रोज राह देखता
प्रियतम की
४-मलें गुलाल
प्यारे से मुख पर
है होली आज
५-उड़ा गुलाल
होली में बरसा रंग
जीना मुहाल
६-होली में होली
जल गई बुराई
विजयी सत्य
आशा

होली








 होली रंग रंगीली  आई
प्यार की सौगात लाई
कड़वाहट को भूल   कर
मन को डुबोती प्रेम रंग में |
इस रंगों के  त्योहार का
है यही सरल सा उपाय 
भाईचारे को निभाने का 
मन में भरा  कलुष मिटाने का |
लगाए जो भी  गुलाल
लाल सारा मुंह कर जाए
जब गुलाल  हटाया जाए
प्यार के निशान  छोड़ जाए |
यह रंगों का खेल नहीं
यह तो हैआपस की  वर  जोरी
बड़ा इन्तजार रहता है
इन लम्हों को जीने का |
खुशहाली का आलम ऐसा
भुलाया नहीं जा सकता
रंगों का तालमेल ऐसा
अपनाना सहज नहीं है |
रंगीनी जीवन में घुलती है ऐसे
 शक्कर मिली हो पानी में जैसे  
बहुत समय तक मिठास  बनी रहती है
होली पर घोटी गई भंग में |
फाग के गीत गाना किसे नहीं सुहाता
  फगुआ मांगना मन को बहुत भाता
चंग की थाप पर  थिरकना नाचना
अद्भुद समा होता इस त्योहार का |
                                               आशा

17 मार्च, 2019

वह दिन जरूर आएगा







वह दिन जरूर आएगा
तुम  हमें न भूल पाओगे
किस्से देश प्रेम के 
 जब भी  दोहराए जाएंगे   
देश से मोहब्बत के फसानों में
 हमारा नाम आएगा
 जितनी भी कोशिश  कर लो
हमें न भूल पाओगे
किताब के पन्ने में
हमारा नाम लिखा जाएगा
हमारा प्यार रंग लाएगा
प्यार की होली न जलेगी
नफरत होगी  अलविदा
हमारा प्यार होगा बेमिसाल
 भाईचारे की ओर बढ़ता कदम
 है  आवश्यकता बहुत
वर्तमान  युग में सौहार्द की
इसी कमी को दूर कर
नया भारत बनेगा शक्तिसंपन्न
अलग अलग विचारों से
तकरार बढ़ती है
 होता यही  अलगाव का कारण  
समान विचारों से दिलों की
 दरारें मिटती हैं
होते एक समान विचार जब
सभी योजनाएं होती सफल
जब सफलता की पायदान चढ़ेंगे
तभी प्रजातंत्र में निखार आएगा
सच्चा जनतंत्र नजर आएगा | 
                                                                            आशा

16 मार्च, 2019

होना न मगरूर








होना न मगरूर
जब भी कोई बड़ी
 उपलब्धि पाओ
हो एक आम आदमी
 जमीन से जुड़े हुए
यह न जाना भूल
यदि पंख फैलाए
 उड़ने के लिए
गिर जाओगे जमीन पर
चाटते रह जाओगे धूल
अपना अस्तित्व खो बैठोगे
दिल में चुभेंगे शूल
जो देंगे पीड़ा असीम
सह्न न कर  पाओगे उसे
रोम रोम होगा दुखी
उस दर्द  को  न सह पाओगे
एक गलत कदम
 होता कितना कष्टकर
 न जाना उधर भूल
अस्तित्व से सुलह  न की यदि  
टूट जाओगे बिखर कर
गरूर चूर चूर होगा
यदि सोच कर भ्रमित हुए
                                       और हुए मगरूर |

14 मार्च, 2019

जब याद तुम्हारी आएगी




                                       विरहन सोच रही मन में
विचारों में खोई खोई
याद तुम्हारी जब भी आएगी  
हर बार कोई समस्या आएगी 
वह अकेले न रह पाएगी 
क्यूँ समझ में न आ पाएगी 
है ऐसी कैसी उलझन 
जो हल न हो पाएगी
  यूँ तो 
यादों में खो जाना 
बड़ा प्यारा लगता है 
 प्यारा सा एहसास
 
जागृत  होने लगता है
पर कब मुसीबत बढ़ जाएगी
सब को कैसे समझाएगी 
सब की नजरों में  तो न गिर जाएगी 
अभी दीखती बहुत लुभावनी
क्या होगा जब
जब विरह वेदना बढ़ जाएगी
 दिल से न जा पाएगी 
बारम्बार समीप  आकर
 चैन लूट ले जाएगी 
मुझ पर हावी हो
   मुझे बहुत  सताएगी 
मेरे आकर्षण की शक्ति
 क्षीण होती जाएगी 
तुम्हारा नहीं आना
बेचैन मन को न रास आएगा
दृष्टि  दरवाजे पर टिकी रहेगी  
अलगाव फीका न  हो पाएगा 
विरही मन है कितना आकुल
यह सबको कैसे समझाएगी |
आशा