14 नवंबर, 2018

बहुत हो चुका




बहुत हो चुका खेल लुका छिपी का
वादे करने का पर उन्हें 
 पूरा न करने का
 अति हो गई अब तो
जनता की सहन शक्ति की
पांच बरस होने को आए
एक भी कार्य पूरा न कर पाए
किस मुंह से फिर सामने आएं
पर वादे  तो वादे   हैं
 क्या जरूरी है पूरे किये जाएं
जा पहुंचेंगे समक्ष जनता के
कोई दलील ले कर
 क्षमा याचना कर लेंगे 
शर्म  से सर झुक जाएगा
 पर नेता कभी  नहीं
अपनी गलती कभी न स्वीकारेंगे
गर्व से सर उन्नत कर
मताधिकार की मांग करेंगे
आनेवाले कल की जिम्मेदारी
 निभाने को होंगे तत्पर
केवल वादे करेंगे करते रहेंगे
 पूरा करने को कभी न तत्पर
बहुत हो चुका यह चुनाव का खेल
अब तो जनता उक्ता  गई है
इस नकली प्रजातंत्र से तानाशाही से
चंद जने ही लाभ लेते हैं
मिठाई मलाई खा लते हैं
आम  लोगों को खाना तक
 मयस्सर  नहीं  होता
उनके कुत्ते भी जो नहीं खाते
सूंध कर छोड़ जाते हैं
 घूरे पर से जूठन उठा कर
 पेट की आग बुझा लेते हैं
इस बात का कोई अंत नहीं
यह प्रजातंत्र नहीं है  परतंत्र
अब बहुत हो गया
इसका कोई न अंत |
आशा

13 नवंबर, 2018

आस्था




 

आस्था है मन की  मर्जी
किसी पर थोपी नहीं जाती
जिसकी जैसी सोच हो
वह वहीं ठहर जाती |
आत्मविश्वास सुद्रढ़ हो जब
 कोई नहीं बदल सकता उसे
मन का मालिक है वह
अच्छे बुरे का है  भान 
तभी सफल है जिन्दगी
 यही उसका प्रमाण |
कब होता  आस्था का जन्म  
यह भी निश्चित नहीं होता
किस  में हो किस पर हो
कहा नहीं जा सकता |
किशोरावस्था  में कोई
 बहुत मन पर छाता
वय  परिवर्तन के साथ
 बदल जाते है भाव
यौवन में किसी पर
अंध विश्वास तो होता है
पर आस्था नहीं|
यह होती आवश्यकता
उम्र के अंतिम पड़ाव की
तभी याद आते पाप पुन्य
जो भी किये पूरे जीवन में
आस्था का जन्म होता  
भगवत भजन याद आते
रह जाते जाने अनजाने  में
आस्था रूप बदल लेती भक्ति में
यही है कहानी आस्था की |
आशा

09 नवंबर, 2018

त्यौहार विशिष्ट



विशिष्ट त्यौहार आया
है पांच दिवस का
रंग रोगन का
साफ सफाई का
जिस घर में हो उजास
वहीं रहे लक्ष्मी का वास
द्वार सजाए दीप जला कर
 करते रहते  इन्तजार
माँ लक्ष्मी का
सुख समृद्धि आती है वहां
जहां स्वच्छता करती निवास
शुचिता मन में रहे जिसके
वही सफल हो जिन्दगी में
माँ लक्ष्मी के चरण
पड़े जिस घर में
वहीं रहे लक्ष्मी का वास
वहीं सकारात्मक होता सोच
प्रेम भाव से होता लाभ
लक्ष्मी वहींं रहना चाहती
जहाँँ सुख शान्ति से
भरा पूरा रहे परिवार
धन धान्य से हो भरपूर 
दुःख दरिद्रता से दूर
देवी माँ के चरण
जिस द्वार से आते
घर में खुशियाँ लाते |
है यही इस विशिष्ट
त्यौहार का सन्देश |
आशा