11 सितंबर, 2010

ज्योत्सना

मैं और तुम ,
सदा से ही साथ रहते हैं ,
नहीं है शिकायत मुझे तुमसे ,
मैं जानना चाहता हूं ,
क्या काले दाग हैं,
मेरे चेहरे पर ,
वे तुमने भी कभी देखे हैं ,
चांदनी ने कहा चाँद से ,
मैं हर पल साथ रहती हूं ,
तुम्हारी शीतल किरणें बिखेरती हूं ,
व्यथित मन को शान्ति देती हूं ,
यांमिनी का सौंदर्य बढा देती हूं ,
यह तुम्हारी ही तो देंन है ,
नदी का किनारा हो ,
और चांदनी रात हो ,
लोग घंटों गुजार देते हैं ,
तुम्हारी स्निग्धता और आकर्षण ,
उन्हें बांधे रहते हैं ,
मैने तुम मैं कोई कमी नहीं देखी ,
यदि तुम्हें कोई दोष देता है ,
वह नहीं जान पाया तुमको ,
मैं बस इतना जानती हूं ,
हूं ज्योत्सना तुम्हारी ,
पृथ्वी पर विचरण करती हूं ,
जैसे ही भोर होती है ,
साथ तुम्हारे चल देती हूं |
आशा