30 अप्रैल, 2011

बर्फ का लड्डू


घंटी का स्वर
पहचानी आवाज

सड़क के उस पार
करती आकृष्ट उसे |
स्वर कान में पड़ते ही
उठते कदम उस ओर
रँग बिरंगे झम्मक लड्डू
लगते गुणों क़ी खान |
जल्दी से कदम बढाए
अगर समय पर
पहुंच ना पाए
लुट जाएगा माल |
पैसे की कोइ बात नहीं
आज नहीं
तो कल दे देना
पर ऐसा अवसर ना खोना |
ललक बर्फ के लड्डू की
बचत गुल्लक की
ले उडी
पर जीभ हुई लालम लाल |
फिर होने लगा धमाल
क्यूँ की
गर्मी की छुट्टी भी आई
ओर परिक्षा हुई समाप्त |
आशा