28 नवंबर, 2011

तलवार परीक्षा की

कब तक पढ़ना कितना पढ़ना ,
अब तलक चलता रहा |
लटकी तलवार परिक्षा की ,
अनकहा कुछ न रहा ||
जो भी कोशिश की थी तुमने ,
काम तो आई नहीं |
यही लापरवाही तुम्हारी ,
रास भी आई नहीं ||
है परिक्षा अब तो निकट ही ,
विचारों में मत बहो |
सारे समय उसी की सोचो
उसी में डूबे रहो ||
करो न बरबादी समय की ,
मेरा कहा मान लो |
जो ठान लोगे अपने मन में ,
होनी वही जान लो ||
आशा

22 टिप्‍पणियां:

  1. है परिक्षा अब तो निकट ही ,
    विचारों में मत बहो |
    सारे समय उसी की सोचो
    उसी में डूबे रहो ||


    अति सुन्दर, बधाई.

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  2. बेहतरीन !

    ----
    कल 29/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  3. 1 Din Ke 24 'Ghante"
    .
    7 sone ke
    8 kamane ke,
    3 Traveling ke
    1 Toilet-Bath ke,
    2 khane pine ke,
    2 Biwi Bacche ke,
    .
    Apne liye Bacha kya '......"

    From everything is canvas

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  4. जो ठान लोगे अपने मन में होगा वही ...सच बात है लेकिन आज कल अपने यहाँ पढ़ाई को लेकर प्रतियोगिता इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि ठान लेने के बावजूद भी बिचारे बच्चों को उनके मन चाहे परिणाम नहीं मिल पाते बहुत खूब लिखा है आपने समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है http://mhare-anubhav.blogspot.com/.

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  5. मन में जो ठान लिया जाए - तो सब कुछ संभव है :)

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  6. आशा जी,...
    ज्ञान बांटती बहुत ही सुंदर प्रस्तुति,..
    बेहतरीन रचना अच्छी लगी ,..
    मेरे पोस्ट 'शब्द'में आपका इंतजार है...

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  7. प्रेरणादायक रचना अच्छी लगी बधाई

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  8. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!यदि किसी ब्लॉग की कोई पोस्ट चर्चा मे ली गई होती है तो ब्लॉगव्यवस्थापक का यह नैतिक कर्तव्य होता है कि वह उसकी सूचना सम्बन्धित ब्लॉग के स्वामी को दे दें!
    अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  9. है परिक्षा अब तो निकट ही ,
    विचारों में मत बहो |
    सारे समय उसी की सोचो
    उसी में डूबे रहो ||

    परीक्षा के बहाने सुन्दर चिंतन....
    सादर बधाई...

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  10. अति सुन्दर प्रेरणादायी प्रस्तुति
    सादर शुभ कामनायें !!!

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  11. प्रवाहमयी रचना के लिए आभार . सही कहा है .

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  12. सार्थक, सामयिक, सराहनीय , आभार.

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  13. अध्यापकों की सीख याद दिलाती कविता.जीवन के सच को समेटे हुए.

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं

Your reply here: