कब तक पढ़ना कितना पढ़ना ,
अब तलक चलता रहा |
लटकी तलवार परिक्षा की ,
अनकहा कुछ न रहा ||
जो भी कोशिश की थी तुमने ,
काम तो आई नहीं |
यही लापरवाही तुम्हारी ,
रास भी आई नहीं ||
है परिक्षा अब तो निकट ही ,
विचारों में मत बहो |
सारे समय उसी की सोचो
उसी में डूबे रहो ||
करो न बरबादी समय की ,
मेरा कहा मान लो |
जो ठान लोगे अपने मन में ,
होनी वही जान लो ||
आशा
अब तलक चलता रहा |
लटकी तलवार परिक्षा की ,
अनकहा कुछ न रहा ||
जो भी कोशिश की थी तुमने ,
काम तो आई नहीं |
यही लापरवाही तुम्हारी ,
रास भी आई नहीं ||
है परिक्षा अब तो निकट ही ,
विचारों में मत बहो |
सारे समय उसी की सोचो
उसी में डूबे रहो ||
करो न बरबादी समय की ,
मेरा कहा मान लो |
जो ठान लोगे अपने मन में ,
होनी वही जान लो ||
आशा
21 टिप्पणियां:
bahut sunder,sarthak sandesh ....
abhar.
है परिक्षा अब तो निकट ही ,
विचारों में मत बहो |
सारे समय उसी की सोचो
उसी में डूबे रहो ||
अति सुन्दर, बधाई.
बेहतरीन !
----
कल 29/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
सार्थक व सटीक शब्द रचना ।
बहुत सुन्दर लिखा है आपने
1 Din Ke 24 'Ghante"
.
7 sone ke
8 kamane ke,
3 Traveling ke
1 Toilet-Bath ke,
2 khane pine ke,
2 Biwi Bacche ke,
.
Apne liye Bacha kya '......"
From everything is canvas
मन में जो ठान लिया जाए - तो सब कुछ संभव है :)
बहुत सुन्दर लिखा है
आशा जी,...
ज्ञान बांटती बहुत ही सुंदर प्रस्तुति,..
बेहतरीन रचना अच्छी लगी ,..
मेरे पोस्ट 'शब्द'में आपका इंतजार है...
बहुत खूब।
प्रेरक पोस्ट।
प्रेरणादायक रचना अच्छी लगी बधाई
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!यदि किसी ब्लॉग की कोई पोस्ट चर्चा मे ली गई होती है तो ब्लॉगव्यवस्थापक का यह नैतिक कर्तव्य होता है कि वह उसकी सूचना सम्बन्धित ब्लॉग के स्वामी को दे दें!
अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।
है परिक्षा अब तो निकट ही ,
विचारों में मत बहो |
सारे समय उसी की सोचो
उसी में डूबे रहो ||
परीक्षा के बहाने सुन्दर चिंतन....
सादर बधाई...
सुंदर प्रस्तुति
अति सुन्दर प्रेरणादायी प्रस्तुति
सादर शुभ कामनायें !!!
प्रवाहमयी रचना के लिए आभार . सही कहा है .
प्रभावशाली रचना.....
bahut khub.....satik rachna
सार्थक, सामयिक, सराहनीय , आभार.
Sundar rachna . Bahut achchha likha hai ! Har shabd arthpoorn hai .
अध्यापकों की सीख याद दिलाती कविता.जीवन के सच को समेटे हुए.
एक टिप्पणी भेजें