28 नवम्बर, 2011

तलवार परीक्षा की

कब तक पढ़ना कितना पढ़ना ,
अब तलक चलता रहा |
लटकी तलवार परिक्षा की ,
अनकहा कुछ न रहा ||
जो भी कोशिश की थी तुमने ,
काम तो आई नहीं |
यही लापरवाही तुम्हारी ,
रास भी आई नहीं ||
है परिक्षा अब तो निकट ही ,
विचारों में मत बहो |
सारे समय उसी की सोचो
उसी में डूबे रहो ||
करो न बरबादी समय की ,
मेरा कहा मान लो |
जो ठान लोगे अपने मन में ,
होनी वही जान लो ||
आशा

21 टिप्‍पणियां:

अनुपमा त्रिपाठी... ने कहा…

bahut sunder,sarthak sandesh ....
abhar.

S.N SHUKLA ने कहा…

है परिक्षा अब तो निकट ही ,
विचारों में मत बहो |
सारे समय उसी की सोचो
उसी में डूबे रहो ||


अति सुन्दर, बधाई.

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बेहतरीन !

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कल 29/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

सदा ने कहा…

सार्थक व सटीक शब्‍द रचना ।

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत सुन्दर लिखा है आपने

Unlucky ने कहा…

1 Din Ke 24 'Ghante"
.
7 sone ke
8 kamane ke,
3 Traveling ke
1 Toilet-Bath ke,
2 khane pine ke,
2 Biwi Bacche ke,
.
Apne liye Bacha kya '......"

From everything is canvas

shilpa mehta ने कहा…

मन में जो ठान लिया जाए - तो सब कुछ संभव है :)

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

बहुत सुन्दर लिखा है

dheerendra ने कहा…

आशा जी,...
ज्ञान बांटती बहुत ही सुंदर प्रस्तुति,..
बेहतरीन रचना अच्छी लगी ,..
मेरे पोस्ट 'शब्द'में आपका इंतजार है...

Atul Shrivastava ने कहा…

बहुत खूब।
प्रेरक पोस्‍ट।

Sunil Kumar ने कहा…

प्रेरणादायक रचना अच्छी लगी बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!यदि किसी ब्लॉग की कोई पोस्ट चर्चा मे ली गई होती है तो ब्लॉगव्यवस्थापक का यह नैतिक कर्तव्य होता है कि वह उसकी सूचना सम्बन्धित ब्लॉग के स्वामी को दे दें!
अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

है परिक्षा अब तो निकट ही ,
विचारों में मत बहो |
सारे समय उसी की सोचो
उसी में डूबे रहो ||

परीक्षा के बहाने सुन्दर चिंतन....
सादर बधाई...

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri ने कहा…

अति सुन्दर प्रेरणादायी प्रस्तुति
सादर शुभ कामनायें !!!

Amrita Tanmay ने कहा…

प्रवाहमयी रचना के लिए आभार . सही कहा है .

sushma 'आहुति' ने कहा…

प्रभावशाली रचना.....

anju(anu) choudhary ने कहा…

bahut khub.....satik rachna

S.N SHUKLA ने कहा…

सार्थक, सामयिक, सराहनीय , आभार.

Sadhana Vaid ने कहा…

Sundar rachna . Bahut achchha likha hai ! Har shabd arthpoorn hai .

संतोष पाण्डेय ने कहा…

अध्यापकों की सीख याद दिलाती कविता.जीवन के सच को समेटे हुए.