10 मार्च, 2017

बेटा चाँद पकड़ना चाहे


निशा के अन्धकार में 
चन्दा चमके आसमान में 
नन्हां बेटा पकड़ना चाहे 
 चन्दा मामा  हाथ में  |
बहलाया कई लालच दिए
अन्दर बाहर ले कर गई 
ध्यान बटाने की कोशिश में 
 जिद्द बेटे की बढ़ती गई |
हद तो तब हुई जब 
 डबडबाई आँखें उसकी 
वह बिना चाँद के   सोना न  चाहे 
रोने का हथियार चलाए |
मैंने बहुत विचार किया 
अपना बचपन याद किया 
एक बार मां ने जलभरी परात में 
चन्दा मुझे दिखाया था |
जल्दी से परात लाई 
जलभर कर आँगन में आई 
जल में अक्स चन्दा मामा का 
बेटे से पकड़वाना चाहा |
किये अथक प्रयास पर व्यर्थ रहे 
वह थक गया और सो गया 
सुबह तक वह भूल गया 
किस बात के लिए जिद्द की थी |
न चाँद था न रात आँगन में
 केवल पानी भरी परात थी
भोली भाली जिद्द ने उसकी
मेरा बचपन याद दिलाया
बीती यादों में पहुंचाया |
आशा