21 अक्तूबर, 2010

उन यादों में खो जायें



यहां आओ पास बैठो हम उन यादों में खो जाएं
वे गीत गुनगुनाएं जो कभी गाया करते थे
उन्हें रचते थे एक दुसरे को सुनाया करते थे
मुझसे कहीं दूर न जा सकोगे

अटूट प्यार के बंधन को यूं ठुकरा न सकोगे
कैसे भुला पाओगे
जब भी यह मौसम आएगा उन यादों को साथ लाएगा
बार बार वहीँ ले जाएगा
जहां कभी हम मिलते थे अपनी रचनाएं गाते थे
कई धुनें बनाते थे
जब भी आँखें बंद करोगे याद आएंगे वे लम्हें
आखें नम हो जाएगीं
उन्हें विदा ना कर पाओगे
ऐसा कुछ भी तो नहीं था जिसे सच समझ बैठे
कुछ ऐसा कर गए
जिसे सोचना भी कठिन था
अब सीख लिया है वह चर्चा कभी ना हो
जो दिल में चुभ जाए
 घाव कर जाए हमें दुखी कर जाए
कभी लव पर वे बातें नहीं आएंगी
गैरों के समक्ष चर्चा का विषय ना बन पाएंगी
चिंता नहीं है कि लोग क्या कहेंगे
पर बंधन यदि टूटा
मुझे मिटा कर रख देगा जीवन वीरान कर देगा
है मेरी इच्छा बस इतनी
हम दौनों फिर से गीत लिखें पहले से प्यार मैं खो जाएं
मेरी  अधूरी चाह छोड़
तुम कहीं भी ना जा सकोगे
यदि भूले से हुआ ऐसा मुझे कभी ना पा सकोगे
फिर एकाकी कैसे रह पाओगे |
आशा

7 टिप्‍पणियां:

  1. bahut khoobsooratee se atoot bandhan kee baat kar gayee aap...........

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  2. बहुत सुन्दर रचना ! मन में यही उत्साह और विश्वास बना रहना चाहिये तो जीवन स्वयमेव संगीतमय हो जाएगा ! मन के कोमल भावों का बहुत खूबसूरत प्रस्तुतिकरण ! बधाई !

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  3. बिल्‍कुल सही निर्णय है। यदि उनका साथ नहीं तो क्‍या हुआ, यादें तो हैं ना। फिर क्‍यों न उनकी नामौजूदगी में उनकी यादों में खो जाया जाए... बेहतरीन प्रस्‍तुति। सबसे बड़ी बात कि पढ़ते ही अहसास प्रकट होने लगते हैं। शब्‍दों में भावनाएं उड़ेल दी हैं आपने तो।
    आज पहली बार आपके ब्‍लॉग पर आने का मौका मिला। लेकिन आपकी लेखनी का ऐसा जादू हम पर चला कि हम आपके मुरीद ही हो चले। लीजिए आज से ही आपको फॉलो किया..।

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  4. सुन्दर भाव संयोजन।
    आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (22/10/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

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  5. puraani yaaden puraana pyar bs yhi he ap apaki lekhni ka dulaar bhut achche andz men achcha lekhn he mubark ho. akhtar khan akela kota rajsthan

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  6. यादें कुरेदती हुई आपकी ये कविता अच्छी लगी.

    कुँवर कुसुमेश

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