29 दिसंबर, 2010

दुनिया एक छलावा है


हूँ एक ऐसा अभागा 
दुनिया ने ठुकराया जिसे
वे भी अपने न हुए
विश्वास था जिन पर कभी
सफलता कभी हाथ नहीं आई
असफलता ने ही माथा चूमा
साया तक साथ छोड़ गया
तपती धूप में जब खड़ा पाया
कभी सोचा है  भाग्य ही खराब 
हर असफलता पर कोसा उसे
जो दुनिया रास नहीं आई
बार-बार धिक्कारा उसे
मेरी बदनसीबी पर
चन्द्रमा तक रोया
प्रातः काल उठते ही
पत्तियों पर आँसू उसके दिखे
चाँदनी तक भरती सिसकियाँ
बादलों की ओट से
फिर भी जी रहा हूँ
ले लगन ओर विश्वास साथ
साहस अभी भी बाकी है
आशा की किरण देती  दिखाई 
सफल भी होना चाहां 
पर इतना अवश्य जान गया हूँ
है दुनिया एक छलावा
वह किसी की नहीं होती
जब भी बुरा समय आये
वह साथ नहीं देती |


आशा

12 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय आशा माँ
    नमस्कार !
    साहस अभी भी बाकी है ,
    आशा की किरण दिखाई देती है ,
    सफल भी होना चाहता हूं ,
    पर इतना अवश्य जान गया हूं ,
    दुनिया एक छलावा है ,
    .....कविता के माध्यम से बहुत अच्छी जानकारी दी आपने ...धन्यवाद ...

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  2. दुनिया एक छलावा है........
    Aasha maa, maa kahkar mann ko bahut achchha lag raha hai, saalon se is naam se kisi ko nahi pukara.. aapne duniya ki sachchai dikha di apni rachna me

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  3. बहुत सही!
    समय के आगे सब मजबूर हैं!

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  4. मायावी दुनिया की हकीकत बयान करती एक सुन्दर प्रस्तुति ! सुन्दर रचना के लिये आभार एवं शुभकामनायें !

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  5. फिर भी जी रहा हूं ,
    ले लगन ओर विश्वास साथ ,
    साहस अभी भी बाकी है ,
    आशा की किरण दिखाई देती सुंदर कविता -आशा की किरण दिख जाये तो जीने की राह मिलती है .

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  6. शानदार विचारोँ की अभिव्यक्ति । उत्साह से भर देने वाली रचना । आभार जी ।


    " नज़रेँ मिलाके ना नज़रेँ झुकाओँ........गजल "

    http://vishwaharibsr.blogspot.com

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  7. बहुत अच्छी कविता ..इस कडवी हकीकत से सभी को गुजरना पड़ता है ..जीवन मे बार बार ...फिर भी अंतिम पन्तियाँ बहुत अच्छी लगी

    फिर भी जी रहा हूं ,
    ले लगन ओर विश्वास साथ ,
    साहस अभी भी बाकी है ,
    आशा की किरण दिखाई देती है ,

    आदर सहित
    मंजुला

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  8. आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल रविवार (13-04-2014) को ''जागरूक हैं, फिर इतना ज़ुल्म क्यों ?'' (चर्चा मंच-1581) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर…

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  9. विश्वास , लगन और साहस बाकी है माने दुनिया में विश्वास भी बाकी है अभी !

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  10. आपकी इस पोस्ट को आज के ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है...
    आज का बुलेटिन, महंगी होती शादियाँ, कच्चे होते रिश्ते

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