04 जून, 2013

आवास आत्मा का

अस्थि मज्जा से बना यह पिंजर 
प्राण वायु से सिंचित 
दीखता  सहज सुन्दर 
आकृष्ट सभी को करता |
पर कितना असहाय क्षणभंगुर
कष्टों को  सह नहीं पाता
तिल तिल मिटता
बेकल रहता तिलामिलाता
किरच किरच बिखरता शीशे सा
यहीं निवास अक्षय आत्मा का 
है आभास उसे
 पिंजर के स्वभाव का |
ओढ़े रहती  अभेद्य कवच 
कभी क्षय नहीं होती 
एक से अलग होते ही 
दूसते घर की तलाश करती
अपना स्वत्व मिटने न देती |
है कितना आश्चर्य 
पिंजर नश्वर पर वह नहीं 
होते ही मुक्त उससे 
समस्त ऊर्जा समेत 
उन्मुक्त पवन सी
अनंत में विचरण करती 
सदा सोम्य बनी रहती |
जैसे ही तलाश पूर्ण होती
पिछला सब कुछ भूल
नवीन कलेवर धारण करती 
नई डगर पर चल देती |
आशा








20 टिप्‍पणियां:

  1. बढियां रचना. वेदांत के भाव को आपने प्रभावशाली रूप में व्यक्त किया है.

    -अभिजित (Reflections)

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  2. आज ०४/०६/२०१३ को आपकी यह पोस्ट ब्लॉग बुलेटिन - काला दिवस पर लिंक की गयी हैं | आपके सुझावों का स्वागत है | धन्यवाद!

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  3. उत्तर
    1. स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण बहुत समय बाद ब्लॉग पर आई हूँ |टिप्पणी हेतु आभार |
      आशा

      हटाएं
  4. नश्वर शरीर में अजर अमर आत्मा निवास करती है और यह अशरीरी आत्मा उन्मुक्त होती है कहीं भी विचरण करने के लिये ! इस सत्य को बड़ी खूबी से अभिव्यक्त किया है अपनी रचना में ! दर्शन तत्व से भरपूर बहुत ही अच्छी रचना !

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (05-06-2013) के "योगदान" चर्चा मंचःअंक-1266 पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    उत्तर
    1. मैं तबियत ठीक न होने के कारण बहुत समय बाद ब्लॉग पर आपई हूँ | टिप्पणी हेतु आभार |

      हटाएं
  6. शारीर और आत्मा ,एक पिंजड़ा है तो दूसरी पंछी है - सुन्दर प्रस्तुति !
    latest post मंत्री बनू मैं
    LATEST POSTअनुभूति : विविधा ३

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  7. जीवन-दर्शन की काव्यमय अभिव्यक्ति!

    जवाब देंहटाएं
  8. ........प्रभावशाली रचना
    जरूरी कार्यो के ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ

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  9. पंजर-कफस से मुक्ति के बाद नवजीवन तक की सुन्दर अभिव्यक्ति.

    जवाब देंहटाएं
  10. टिप्पणी हेतु आभार |
    आशा

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  11. जैसे ही तलाश पूर्ण होती
    पिछला सब कुछ भूल
    नवीन कलेवर धारण करती
    नई डगर पर चल देती-------

    गहन अनुभूति
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    सादर

    आग्रह है
    गुलमोहर------

    जवाब देंहटाएं
  12. जैसे ही तलाश पूर्ण होती
    पिछला सब कुछ भूल
    नवीन कलेवर धारण करती
    नई डगर पर चल देती-------

    गहन अनुभूति
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    सादर

    आग्रह है
    गुलमोहर------

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