31 जुलाई, 2013

घर मेरा



घर मेरा गाँव में छोटा सा
पर आँगन उसमें बहुत बड़ा
पेड़ लगे नीम आम के
अमलताश और जामुन के |
तुलसी चौरे पर लहराती
दीप जला पूजी जाती
अपूर्व शान्ति मन में आती 
शाम ढले उस आँगन में |
पंछी आते जाते रहते
मींठी तान सुनाते रहते
सावन आया वर्षा आई
दिग्दिगंत हरियाली छाई |
अमवा पर झूला डलवाया
माँ से लहरिया रंगवाया
पहन उसे खुशी से झूमीं
सखियों के संग जी भर झूली |
बारिश में चूनर भीगी
तन भीगा मन भी भीगा
यूं ही सारा दिन बीत गया
तुझे न आना था ना आया |
तेरा मेरा जन्मों  का नाता
यह भी शायद भूल गया
मेरी आँखें भर भर आईं
यदि आ जाता तो क्या जाता ?
आशा

21 टिप्‍पणियां:

  1. आँगन... स्मृतियों में ही रह गया अब!

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  2. माँ का आंगन स्मृतियों के सबसे अनमोल धरोहर.... बहुत सुंदर ..

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  3. सावन की शुभकामनायें-
    मनभावन परिदृश्य-
    आभार

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  4. तन भीगा मन भी भीगा....touching ...

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  5. naanee ka ghar gujre bachpan ke din yaad aa gaye ..poora drishy hee saamne khada kar diya ..behad shandaar ..sadar pranam ke sath

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  6. सावन के फुहार से तन मन भीग गया ,तुझे न आना था ना आया |--बहुत सुंदर
    latest post,नेताजी कहीन है।
    latest postअनुभूति : वर्षा ऋतु

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  7. बहुत की खूबसूरत चित्रण |
    प्रकृति का खूबसूरत वर्णन ,
    जेहन में ,
    अपने पैतृक पुरखो के घर
    की यादें पुन्ह ताजा हों गयी |
    एक शाम संगम पर {नीति कथा -डॉ अजय }

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  8. सावन के झूले पड़े तुम चले आते तो तुम्‍हारा क्‍या जाता? शाम को तुलसी का दीप मन को कितनी शांति प्रदान करता है वाकई। बहुत बढ़िया कविता/गीत।

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  9. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ....मन भीग गया सावन मे आँगन मे ....!!

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  10. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 01/08/2013 को चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें
    धन्यवाद

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  11. savan ke aagaman se prafullit man aur fir virah vyatha ka sundar chitran hai

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  12. बहुत सुन्दर सावनी फुहार से भरी रचना ..

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  13. प्राकृतिक चित्रण से सुगठित बहुत सुंदर रचना ! सावन, झूले और सखियाँ इनकी स्मृति मात्र से हृदय उल्लसित हो उठता है ! बहुत बढ़िया !

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  14. सावन की यादें फिर से ताज़ा हो गयीं
    खूबसूरत

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  15. तेरा मेरा जन्मों का नाता
    यह भी शायद भूल गया
    मेरी आँखें भर भर आईं
    यदि आ जाता तो क्या जाता ?
    अति सुन्दर

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  16. टिप्पणी हेतु बहुत बहुत धन्यवाद

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