30 नवंबर, 2013

स्वप्न अमूर्त


-स्वप्नों में जीना
उनमें ही खोए रहना
आनंद है ऐसा
गूंगे के स्वाद  जैसा |
अवर्णनीय वह मिठास
और उसकी ऊष्मा
मन के हर कौने में
होना ही चाहिए |
महक उसकी दूर तक
पहुंचे या ना पहुंचे
प्यार पाने की आस
कम न होनी चाहिए |
स्वप्नों में आना चले जाना
कोई  नई बात नहीं
पर उससे जन्मा उल्लास
आत्मसात होना ही चाहिए |
कभी मिलन की आस भी
बाकी होना चाहिए
हकीकत तो सभी जानते हैं
कभी स्वप्नों में भी खोना चाहिए |
गूंगे के लिए स्वाद गुड़ का
मन को तो छूता पर
पर व्यक्त नहीं कर पाता
स्वप्न अमूर्त भी कुछ ऐसा ही होता  |

16 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति .. गूंगे के गुड़ के स्वाद का क्या खूब बिम्ब इस्तेमाल किया है ..

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  2. बढ़िया है आदरणीया-
    बधाई स्वीकारें-

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  3. आप की ये सुंदर रचना आने वाले सौमवार यानी 02/12/2013 को नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है... आप भी इस हलचल में सादर आमंत्रित है...
    सूचनार्थ।

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    अपनी किसी भी ईमेल द्वारा ekmanch+subscribe@googlegroups.com
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    अभी तो इस मंच का अंकुर ही फुटा है, हमारा आप सब का प्रयास, प्रचार, हिंदी से स्नेह, हमारी शक्ति तथा आत्मविश्वास ही इसेमजबूति प्रदान करेगा।
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  4. बहुत ही खूबसूरत एवँ भावपूर्ण रचना ! बहुत सुंदर !

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (01-112-2013) को "निर्विकार होना ही पड़ता है" (चर्चा मंचःअंक 1448)
    पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. हकीकत जब सताए ,स्वप्न साथ निभाते हैं !
    प्रेरक रचना !

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    उत्तर
    1. टिप्पणी के लिए धन्यवाद वाणी जी टिप्पणी हेतु |
      आशा

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  7. स्वप्नों में आना चले जाना
    कोई नई बात नहीं
    पर उससे जन्मा उल्लास
    आत्मसात होना ही चाहिए |
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति !
    नई पोस्ट वो दूल्हा....

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