22 अप्रैल, 2015

पारा पारा हो गया


पा कर समक्ष उसे 

दिल बल्लियों उछला

बाहों की ऊष्मा पा

वह पारा पारा हो गया |

 चाहा तो बहुत था

कि ना आगे बढ़े

पर रुक न सका

अनियंत्रित हुआ

फिर फिसल गया

दिल के हाथों विवश

 पारे सा लुढ़कता गया

हाथों से निकल गया

पारा पारा हो गया |

आशा



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