28 अप्रैल, 2017

आस अभी ज़िंदा है




जब साँझ का धुँधलका हो
मन कहीं खोया हुआ हो
  सूचना होगी ऐसी
मन में उदासी भर देगी
पर हर वक्त का 
 नकारात्मक सोच
जीवन का सुकून हर लेगा
यदि दीप जलाने का मन ना हो
  जान जाइए समय विपरीत हुआ है
बेमन हो दीप जलाया भी
कब तक बाती जलेगी
धीमी लौ होते ही
दीपक की पलकें झपकेंगी
बंद आँखों में झाँक कर देखिये
वहाँ कोई सपना सजा है
दीप बुझ भी गया तो क्या
कहीं जीवन में रस भरा है
यही अंदाज़ जीने का
आशाओं पर टिका है
जब तक साँस बाकी है
आशा का दीपक जल रहा है
दीप बुझ गया तो क्या
मन में आस अभी ज़िंदा है |

आशा

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