21 फ़रवरी, 2018

बड़ी मछली छोटी को खाती


सृष्टि के इस भव सागर में
बड़ी छोटी विविध रंगों की मछलियाँ
 बड़ी चतुर सुजान अपना भोजन
 छोटी को बनाती  वह बेचारी
 कहीं भी सर अपना  छुपाती 
खोजी निगाहें ढूँढ ही लेतीं 
तब भी उनका पेट न भरता
 दया प्रेम उनमें न होता 
छोटी  सोचती ही रह जातीं
 कैसे करें अपना बचाव
सिर्फ तरकीबें सोचती पर 
पर  व्यर्थ सारे प्रयत्न होते
 कभी किसी नौका का सहारा लेतीं 
सागर की उत्तंग लहरों से  टकरा कर
 नौका खुद ही नष्ट  हो जाती 
यही सच है कि
बड़ी मछली छोटी को निगल जाती  |
आशा


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