20 जनवरी, 2023

कविता एक गीत

 


                                       कविता का गीत बड़ा मदिर

सब से मीठा सब से मंहगा

गाने के शब्द भी चुन लिए

कोमल भावों को सजाया वहां |

 मधुर धुन उसकी गुनगुनाती

एक आकर्षण में बहती जाती

कलकल कर बहती नदिया सी

लहरों पर स्वरों संगम होता |

यही विशेषता है उन दौनों में

एक ही ताल पर शब्दों का थिरकना

मनभावन रूप में सजाए जाना एक नया

 रूप दिखाई देता गीत जीवंत हो जाता |

आशा सक्सेना    

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपने दार्शनिक अनुभव से जन्मी रचना … बहुत सुंदर …

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  2. मेरी रचना को चर्चा मंच में स्थान देने के लिए आभार रवीन्द्र जी |

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  3. ऐसी रचनाएं ही कालजयी हो जाते हैं ! सुन्दर सृजन !

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