19 मार्च, 2023

तुम ना समझे मुझे







हम साथ साथ रहे

मैंने तुम्हें जाना 

तुम्हारी फितरत को पहचाना 

पर तुम ना समझे मुझे||

है मेरी आवश्यकता क्या 

किन  बातों  के पास आकर 

अच्छा नहीं लगता मुझे 

तुमसे क्या अपेक्षा रखती हूँ 

तुम पूरी कर पाओगे या नहीं 

कभी सोचने लगती हूँ 

क्या कुछ अधिक ही 

चाहा तुमसे मैंने 

जब चाह पूरी नहीं होती 

तुमको बेवफ़ा का नाम दे  दिया मैंने 

खुद की खुशी को भी 

अपना नहीं समझ पाती 

पर किसीसे क्या शिकायर करूं 

किसी नेमुझाज्को समझा ही नहीं 

शयद यही प्रारब्ध में लिखा है मेरे |


आशा सक्सेना 


3 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा आज रविवार (१९-०३-२०२३) को 'वृक्ष सब छोटे-बड़े नव पल्लवों को पा गये'(चर्चा अंक -४६४८) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. मन की उथल पुथल की समीचीन अभिव्यक्ति !

    जवाब देंहटाएं

Your reply here: