25 दिसंबर, 2012

नया अंदाज

क्या देख कर
 मुस्कुरा रही हो
जाने  क्या सोच रही हो
सभी को लुभा रही हो |
तुम्हारे चेहरे  का नूर
यह आँखों की चमक
कहती है बहुत कुछ
घुल जाती  मिठास मन में
तुम्हें देख कर |
सरिता भावों से भरी
करती भाव बिभोर
कोई त्रुटि न रह जाए
मन  में रहता भय 
जमाने की बुरी नजर
 से बचाए तुम्हे कैसे |
रहो सदा ऐसी ही
है कामना यही
प्यार भरे अंदाज का
 अदभुद उपहार यही |
आशा