25 जनवरी, 2016

हताशा

 
 
दिलों में पड़ी दरार 
भरना है मुश्किल 
आँगन में खिची दीवार 
करती है मन पर वार  
 पर टूटना मुश्किल 
दीवार ही यदि होती 
कुछ तो हद होती 
पर वहां उगे केक्ट्स 
सुई से करते घाव 
मजबूरन सहना पड़ते
 बचने  नहीं  देते 
सभी  जानते हैं 
खाली हाथ जाना है 
पर एक इंच जमीन के लिए 
बरसों बरस न्याय के लिए 
चप्पलें घिसते रहते 
हाथ कुछ भी न आता 
रह जाती केवल हताशा |