27 सितंबर, 2016

शौक



शौक सहेज कर रखा है
बचपन से लेकर आज तक
उसमें ही डूबी रहती हूँ
सारी उलझने भूल कर
पहले भी अच्छा लगता था
तरह तरह के कपड़े सिलना
उनसे गुड़िया को सजाना
धूमधाम से ब्याह रचाना
आज भी यादों में सजा रखा है
बचपन के उन मित्रों को
उन गलियों को उन खेलों को
रूठना मनाना
खेल से बाहर हो जाना
मनुहार पर वापिस आना
यादों को जीवित रखती हूँ
उन गलियों में जा कर
जो आज भी यथा स्थित हैं
सजोया है यादों को ऐसे
शौक सहेज कर रखा है जैसे |
आशा