04 जुलाई, 2010

सत्यता जीवन की

तरह तरह के लोग ,
आसपास जब होते हें ,
सब एक जैसे नहीं होते ,
कुछ विनम्र दीखते हैं ,
कई उग्र हो जाते है ,
कुछ ऐसे भी होते हैं ,
मीठी छुरी बने रहते हैं |
कटुता मन मैं विष भरती है
नहीं किसी को फलती है ,
सारी कटुता को बिसरा कर ,
क्षमा उसे यदि कर पाएं ,
अपनी गलती यदि खोजी ,
मन मैं पश्चाताप किया ,
हर क्षण खुशी से भर जाएगा ,
बीता कल हावी नहीं होगा ,
सारी कटुता बहा ले जाएगा ,
जीने का सही मार्ग यही है ,
मेरा अपना विश्वास यही है ,
भविष्य में क्या होना है ,
इसकी तो चिंता रहती है ,,
जीवन सफल बनाने की ,
मन में अभिलाषा रहती है ,
जो कल किया और आगे करना है ,
कठिन समस्या रहती है |
आगे बढने की प्रतिस्पर्धा में ,
बैचेनी भी रहती है ,
तटस्थ भाव से यदि देखें ,
भौतिकता सब कुछ नहीं होती ,
मन को संतोष नहीं देती ,
कुछ काम ऐसेभी है ,
जो मन को शांति देते हैं ,
इसी सकून को पाने के लिए ,
निष्काम भाव से जीना होगा ,
बैर भाव और कटुता को ,
खुद से दूर रखना होगा ,
प्रकृति हर नुकसान की ,
भरपाई तभी कर पाएगी ,
जब यह विश्वास जाग्रत होगा ,
सही मार्ग मिलता जाएगा ,
सफलता तुम्हारे कदम चूमेंगी ,
खुशियों से तुमको भर देंगी ,
सदा तुम्हारे साथ चलेगी ,
जीवन आनन्दित कर देगी
आशा

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी सीख देती रचना!

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  2. बहुत सुंदर -लाजवाब -
    गूढ़ -सत्य मार्ग दर्शाती हुई -
    सकारात्मकता से भरपूर-
    आनंदित करती हुई -
    प्रभावशाली रचना ...!!
    बधाई .

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  3. सुन्दर सन्देश देती रचना के लिये बधाई

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  4. शायद इसी का नाम जीवन है.
    बहुत कुछ सीखने को मिलता है आपकी रचना से.
    आखिर आप इस उम्र में रचनात्मक जो है.

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  5. इसी सकून को पाने के लिए ,
    निष्काम भाव से जीना होगा ,
    बैर भाव और कटुता को ,
    खुद से दूर रखना होगा ,
    बहुत खूब ! एक बहुत ही सार्थक और प्रेरणाप्रद रचना ! बधाई एवं शुभकामनायें !

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  6. बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

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