09 सितंबर, 2010

अधूरी कविता

मैं कविता लिखना चाहता हूं ,
उसे पूरी करना चाहता हूं ,
पर वह अधूरी रह जाती है ,
चाहता हूं परिपूर्णता ,
पर कुछ त्रुटि रह ही जाती है ,
और विचार करते करते ,
सारी रात गुजर जाती है ,
और कलम रुक जाती है ,
जैसे ही तुम्हें देखता हूं ,
मुस्कान तुम्हारे चेहरे की ,
अद्वितीय प्रभाव छोड़ जाती है ,
कविता और निखरती है ,
उसमे मुस्कान सिमट जाती है ,
काले घुंगराले कुंतल ,
जब माथे पर लहराते हैं ,
कांति तुम्हारे चेहरे की ,
कई गुना हो जाती है ,
विचार अंगड़ाई लेते हैं ,
फिर कविता मैं,
एक कड़ी और जुड़ जाती है ,
सुंदर सुगढ़ हाथ देख ,
डूब जाता हूं मैं तुम में ,
तब कलम में गति आती है
कुछ पंक्तियाँ साथ लाती है ,
चाहता हूं सामने बैठो ,
मेरी कल्पना की उड़ान बनो ,
जब डूबूं सौंदर्य के खजाने में ,
कारे कजरारे नयनों की,
भाषा समझ पाऊं ,
तभी पूर्णता ला पाउँगा ,
कविता को सवार पाऊंगा ,
पर यह भय सदा रहता है ,
तुम कहीं व्यस्त ना हो जाना ,
तुम्ही मेरी कल्पना हो ,
तुम ही मेरी प्रेरणा हो ,
मैं जब तुम्हें न पाउँगा ,
कल्पना उड़ान न भर पाएगी ,
कविता अधूरी रह जाएगी
आशा




,

8 टिप्‍पणियां:

  1. मैं कविता लिखना चाहता हूं ,
    उसे पूरी करना चाहता हूं ,
    पर वह अधूरी रह जाती है ,
    चाहता हूं परिपूर्णता ,
    पर कुछ त्रुटि रह ही जाती है ,
    और विचार करते करते ,
    सारी रात गुजर जाती है ,ज़िन्दगी की सच्चाई कितनी खूबसूरती से लिखी है -
    अनेक शुभकामनाएं

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  2. मैं कविता लिखना चाहता हूं ,
    उसे पूरी करना चाहता हूं ,
    पर वह अधूरी रह जाती है ,
    चाहता हूं परिपूर्णता ,
    पर कुछ त्रुटि रह ही जाती है ,
    --
    क्योंकि मनुष्य स्वयं अपूर्ण है।
    --
    नर कभी नारायण नही हो सकता है!

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  3. तुम कहीं व्यस्त ना हो जाना ,
    तुम्ही मेरी कल्पना हो ,
    तुम ही मेरी प्रेरणा हो ,
    मैं जब तुम्हें न पाउँगा ,
    कल्पना उड़ान न भर पाएगी ,
    कविता अधूरी रह जाएगी
    .....behad marmsparshi rachna

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  4. .
    तुम ही मेरी प्रेरणा हो ,
    मैं जब तुम्हें न पाउँगा ,
    कल्पना उड़ान न भर पाएगी ,
    कविता अधूरी रह जाएगी ...

    very touching lines..

    ..

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  5. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

    हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है।

    हिन्दी का विस्तार-मशीनी अनुवाद प्रक्रिया, राजभाषा हिन्दी पर रेखा श्रीवास्तव की प्रस्तुति, पधारें

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  6. जब तक प्रेरणा सामने ना हो लेखनी अवरुद्ध हो ही जाती है ! प्रेरणा और प्रेरित का यह अन्योन्याश्रित सम्बन्ध सदियों से चला आ रहा है ! बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना ! बधाई एवँ शुभकामनाएं !

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  7. बेहद खूबसूरत प्रस्तुति।

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