06 नवंबर, 2010

मेरी यादो में ---

मेरी यादों में तू भी,
कभी रोया होगा ,
मेरी तस्वीर को,
आँसुओं से भिगोया होगा ,
पुरानी बातों का जिक्र ,
हर बार हुआ करता था ,
दिल की बातों का इज़हार ,
हो कैसे मालूम न था ,
यूँ बिछुड़ जायेंगे ,
यह सोचा न था ,
कभी ना मिल पायेंगे ,
इसका अन्दाज़ा न था ,
जब भी तेरे साये से ,
लिपट कर रोया मैं ,
सीने में उठे दर्द को ,
सम्हाल ना पाया मैं |


आशा

12 टिप्‍पणियां:

  1. 'असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय ' यानी कि असत्य की ओर नहीं सत्‍य की ओर, अंधकार नहीं प्रकाश की ओर, मृत्यु नहीं अमृतत्व की ओर बढ़ो ।

    दीप-पर्व की आपको ढेर सारी बधाइयाँ एवं शुभकामनाएं ! आपका - अशोक बजाज रायपुर

    ग्राम-चौपाल में आपका स्वागत है
    http://www.ashokbajaj.com/2010/11/blog-post_06.html

    जवाब देंहटाएं
  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  3. दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनायें ...

    जवाब देंहटाएं
  4. बेहद मार्मिक चित्रण्।

    जवाब देंहटाएं
  5. भावपूर्ण प्रस्तुति .........

    जवाब देंहटाएं
  6. बेहद मार्मिक अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर
    डोरोथी.

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति ! अति सुन्दर !

    जवाब देंहटाएं
  8. जब भी तेरे साये से,
    लिपट कर रोया मैं ,
    सीने मैं उठे दर्द को ,
    सम्हाल ना पाया मैं |

    bahoot hi marmik prastuti..... very nice.

    जवाब देंहटाएं
  9. आप सब का मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत आभार |प्रोत्साहित करने के लिए आभार |
    आशा

    जवाब देंहटाएं
  10. भावपूर्ण प्रस्तुति
    .....अपनी तो आदत है मुस्कुराने की !
    नई पोस्ट पर आपका स्वागत है

    जवाब देंहटाएं
  11. मेरी यादों में तू भी,
    कभी रोया होगा ,
    मेरी तस्वीर को,
    आँसुओं से भिगोया होगा ,

    बहुत भावपूर्ण...

    जवाब देंहटाएं

Your reply here: