25 नवंबर, 2010

कोई नहीं जान पाया

चंचल चपला और बिंदास
दिखाई देती सदा ,
पर है इसमें ,
कितनी सच्चाई ,
यह भी कभी
देखा होता ,
थी भोली भाली,
सुंदर बाला ,
कब बड़ी हुई ,
जान न पाई ,
जानें कितनी वर्जनाएं ,
या समझाने की कोशिश ,
लड़कों से
बराबरी कैसी ,
लड़की हो लड़की सी रहो ,
मन में होती
उथल पुथल ,
अक्सर सालने लगी उसे ,
जो है जैसी भी है ,
क्या यह पर्याप्त नहीं है ?
निर्वाह कैसे होगा ,
ससुराल में ,
यही हजारों बार सुना,
ऐसी अनेक बातों का ,
मन पर विपरीत ,
प्रभाव हुआ ,
अनजाने भय ,
का बोध हुआ ,
मानो ससुराल नहीं ,
कैदखाना हुआ ,
सारे कोमल भाव दब गए ,
बाचाल उद्दण्ड ,
स्वभाव हुआ ,
क्या यही सब ,
संस्कारों से पाया ?
लगता यह दोष नहीं
संस्कारों का ,
या माता पिता के
पालन पोषण का ,
समाज में
कुछ देखा सुना ,
अनुभवों ने
बहुत कुछ सिखा दिया ,
अब जो दीखता है
वही सत्य लगता है ,
है क्या वह सच में
चंचल और बिंदास ,
एकांत पलों में ,
जब सोचती है ,
आँखें नम हो जाती हैं ,
वह और व्यथित,
हो जाती है ,
वर्जनाओं के झूले में
उसे सदा
झूलते पाया ,
है वह क्या ?
एक चंचल चपला सी ,
या शांत सुघड़ बाला सी ,
यह कोई ,
नहीं जान पाया |


आशा

13 टिप्‍पणियां:

  1. वर्जनाओं के झूले में ,
    उसे सदा ,
    झूलते पाया ,
    है वह क्या ?

    बेहतरीन ।

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  2. जब तक बालाओं की संवेदनाओं को नहीं समझा जाएगा, तब तक समाज में अत्याचार होते रहेंगे..
    अच्छी प्रस्तुति..

    आभार

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  3. मनोभावों की मर्मस्पर्शी रचना ... बहुत सुन्दर ...

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  4. बिलकुल किसी वास्तविक चरित्र की कहानी सी लगती है ! आम मध्यमवर्गीय भारतीय बाला की कथा जो ज़रा सा होश सम्हालते ही पाबंदियों, वर्जनाओं और निषेधाज्ञाओं की जजीरों में जकड दी जाती है !आखिर उसके मन का आक्रोश कहीं तो बाहर निकलेगा ! बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति ! बधाई एवं आभार !

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  5. उफ्फ! क्या बात है ...बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति ! बधाई एवं आभार

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  6. आपकी इस पोस्ट का लिंक कल शुक्रवार को (२६--११-- २०१० ) चर्चा मंच पर भी है ...

    http://charchamanch.blogspot.com/

    --

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  7. दिल को छूने वाली, खूबसूरत और मर्मस्पर्शी प्रस्तुति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  8. कोमल भावों का बेहद मर्मस्पर्शी चित्रण्।

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  9. है क्या वह सच में
    चंचल और बिंदास
    एकांत पलों में ...


    ये समाज का दुर्भाग्य है जो नारी को उसकी प्रकृति अनुसार पनपने नहीं देता ... पर अब समय बदल रहा है ....

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  10. अत्यंत प्रभावशाली ढंग से आपने असंख्य जीवन का सत्य रेखांकित कर दिया...

    बस और क्या कहूँ....

    मन को छूती, बहुत ही सुन्दर रचना....

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  11. दिल को छु लाना वाली रचना ,,, उम्दा प्रस्तुति ...

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