27 सितंबर, 2011

दिल किसे कहें


है पुंज भावानाओं का
या हिस्सा शरीर का
पर सभी बातें करते
दिल की दिलदारी की |
पल सुख के हों या दुःख के
दौनों ही प्रभावित करते
धडकनें तीव्र होती जातीं
चैन न आ पाता उसको |
हर रंग प्रकृति का
सवाल कर झझकोरता उसे
कभी कोइ जज़बाती करता
बेचैन कर जाता उसे |
मस्तिष्क से उठाती तरंगें
संकेत कुछ देती उसे
वह भावों में डूबा रहता
कल्पनाओं में जीता |
क्या है वह वही दिल
जिसके होते चर्चे आम
दिल लेने देने की बातें
होती रहती सरे आम |
फिर भी कुछ तो होते ऐसे
जो हृदय हीन दिखाई देते
कोइ भी अवसर हो
अनर्गल बातें करते |
पर संवेदनशील हुए बिना
वे कैसे हें रहा पाते
है विचारणीय होता दिल क्या
और
घर कहाँ उसका |
है बड़ी दुविधा किसे दिल कहें
उसे तो नहीं जो धड़के शरीर में
या वह जिसका घर होता
मन मस्तिष्क में |
आशा







15 टिप्‍पणियां:

  1. है बड़ी दुविधा किसे दिल कहें
    उसे तो नहीं जो धड़के शरीर में
    या वह जिसका घर होता
    मन मस्तिष्क में |

    ...सच में यह एक दुविधा में डालने वाला प्रश्न है. आज दिल की बातें सब करते हैं, लेकिन दिल की आवाज़ कौन सुनता है? बहुत सटीक और सुन्दर अभिव्यक्ति..

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  2. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  3. क्या है वह वही दिल
    जिसके होते चर्चे आम
    दिल लेने देने की बातें
    होती रहती सरे आम |
    फिर भी कुछ तो होते ऐसे
    जो हृदय हीन दिखाई देते
    कोइ भी अवसर हो
    अनर्गल बातें करते |
    पर संवेदनशील हुए बिना
    वे कैसे हें रहा पाते
    है विचारणीय होता दिल क्या
    और घर कहाँ उसका |


    सचमुच विचारणीय....
    मनोभावों को बेहद खूबसूरती से पिरोया है आपने....... हार्दिक बधाई.

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  4. वाह वाह कैसे कहूँ........गया ठगा ये गरीब..
    सोचा अच्छा नाम है......जाऊं शीघ्र करीब...
    जाऊं शीघ्र करीब.........करेंगे जी भर बातें....
    कविताओं में रचे बसेंगी......अब ये साँसे....
    पर ईश्वर सब पर यहाँ ..... नेह समान बरसाता...
    प्रेयसी यदि है ना मिली.......मिली है आशा माता....

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  5. बहुत सटीक और सुन्दर अभिव्यक्ति| बधाई|

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  6. है बड़ी दुविधा किसे दिल कहें
    उसे तो नहीं जो धड़के शरीर में
    या वह जिसका घर होता
    मन मस्तिष्क में |

    बहुत सटीक प्रश्न ..अच्छी अभिव्यक्ति

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  7. सुंदर भावमयी प्रस्‍तुति।

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  8. आपको सपरिवार
    नवरात्रि पर्व की बधाई और शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  9. बहुत सुन्दर रचना ! सोचिये और मानिए तो दिल दरिया है भावनाओं का , सागर है अथाह प्यार का और अपरिमित विस्तार है विचारों की उड़ान का और ना मानें तो शरीर में स्थित रक्त संचार करके का एक पम्प मात्र है ! बहुत बढ़िया लिख रही हैं आजकल ! आनंद आ गया !

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  10. बहुत ही अच्छा लिखा आपने।

    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    सादर

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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  12. bahut achcha dil par vishleshan karti rachna.
    Aasha ji navraatri ki badhaai.pls mere blog par aayen meri bachchi meri durga maa ko aashirvaad den.

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