07 अगस्त, 2012

भाषा नहीं भाव प्रवल हैं

नयनों नयनों में बातें करना 
बोलो किससे सीख लिया 
जो सोचा हंस कर जता दिया 
मन मोह लिया सबका तुमने |
इस भोली भाली सूरत में 
कितने राज छुपाए हैं 
मन मोहनी मुस्कान से 
अपने भाव जताए हैं|
हो तुम इतनी प्यारी सी
सफेद मॉम की गुडिया सी 
नयनों के भाव जताए हैं 
है क्या तुम्हारे मन में ?
भाषा नहीं भाव प्रवल हैं
तुम्हारे मधुर स्पर्श में 
 |मन मेरा गदगद होता
पा कर तुम्हें गोद में |
आशा

22 टिप्‍पणियां:

  1. भाषा नहीं भाव प्रवल हैं
    तुम्हारे मधुर स्पर्श में
    |मन मेरा गदगद होता
    पा कर तुम्हें गोद में |......बहुत सुन्दर भाव ...

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  2. यह मधुर भावाभिव्यक्तिपूर्ण परिचय प्यारी आहना का प्रतीत होता है ! है ना ? उसे मेरा ढेर सारा प्यार औए आशीर्वाद दीजियेगा ! उससे मिलने की उत्कंठा तीव्र होती जा रही है ! बहुत प्यारी रचना !

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  3. उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

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  4. इस भोली भाली सूरत में
    कितने राज छुपाए हैं
    मन मोहनी मुस्कान से
    अपने भाव जताए हैं|

    भावपूर्ण रचना.....

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  5. बहुत सुन्दर...
    आपके भाव हम तक भी पहुंचे...
    सादर
    अनु

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  6. बच्चों की भोली सूरत में,बसते है भगवान
    उनके भावो को समझते नही,हम नादाँ इंसान,,,,,

    RECENT POST...: जिन्दगी,,,,

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  7. इन नयनो के भाव आपके शब्दों से छलककर हम तक पहुच रहे हैं... बहुत सुन्दर रचना... आभार

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    1. संध्या जी रचना अच्छी लगी इस हेतु धन्यवाद |

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  8. भाषा नहीं भाव प्रबल है , नन्हे की तस्वीर में भी !

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    1. क्या सच में |यह है नन्हीं आहना मेरे नाती की बेटी |

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  9. चित्र देखकर आ गई, बालकपन की याद।
    लौट रहा फिर बचपना, अब पचपन के बाद।।

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  10. शास्त्री जी यह मेरे नाती की लडकी है इसका नाम आहना रखा है |टिप्पणी हेतु धन्यवाद

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  11. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार o9-08 -2012 को यहाँ भी है

    .... आज की नयी पुरानी हलचल में .... लंबे ब्रेक के बाद .

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    1. संगीता जी आपका आभार मेरी रचना नई पुरानी हलचल में शामिल करने के लिए |

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  12. उत्तर
    1. अनु जी आपको टिप्पणी हेतु धन्यवाद |ऐसा ही स्नेह बनाए रखिये |
      आशा

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  13. बच्चे बिना कुछ कहे भी कितना कुछ कह जाते हैं.

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    1. उसे देख कर इतनी प्रसन्नता होती है कि शब्दों में बयान नहीं कर पाती |
      आपको टिप्पणी हेतु धन्यवाद |

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  14. नन्ही सी आहना की फोटो देख कर बहुत अच्छा लगा।
    बेहतरीन लिखी हैं आंटी!


    सादर

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