29 अगस्त, 2012

तरंगें



उपजती तरंगें मस्तिष्क में
कभी नष्ट नहीं होतीं
घूमती इर्द गिर्द
होती प्रसारित दूसरों को
बनती माध्यम सोच का
जो जैसा मन में सोचता
वही प्रतिउत्तर पाता
सिंचित तरंगे सद् विचारों से
पहुँचती जब दूसरों तक
प्रतिफलित सद् भाव होता
प्रेम भाव उत्पन्न होता
प्रेम के बदले प्रेम
नफ़रत के बदले नफ़रत
है ऐसा ही करिश्मा उनका
होते जाते अभिभूत पहुंचते ही
किसी धर्म स्थल तक
कुछ अवधि के लिए ही सही
होते ओतप्रोत भक्ति भाव में
अनुभव अपार शान्ति का होता
बड़ा सुकून मन को मिलता
मनोस्थिति होती प्रभावित,
 झुकाव धर्म की और होता
इसे और क्या नाम दें
है यह भी प्रभाव तरंगों का |
आशा 









7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी पोस्ट 30/8/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें

    चर्चा - 987 :चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  2. बहुत बढ़िया ! मन में सदैव सकारात्मक तरंगें उपजें तो आस-पास का वातावरण स्वयमेव अनुकूल हो जाये ! लेकिन ऐसा होता कहाँ है ! मन का आक्रोश. कड़वाहट और नफ़रत सब कुछ बिगाड़ देते हैं ! बहुत सुन्दर प्रस्तुति ! आभार आपका !

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  3. तरंगे समूचे व्यक्तित पे प्रकाश डालती हैं ..

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