20 मई, 2013

कितना नीरस होता

एक हथोड़ा व एक बांसुरी 
एक साथ रहते 
जीवन कितना गुजर गया
यह तक नहीं सोचते  |
था हथोड़ा कर्मयोगी 
महनतकश  पर हट योगी 
सदा भाव शून्य रहता 
खुद को बहुत समझता |
थी बांसुरी स्वप्न सुन्दरी 
कौमलांगिनी भावों से भरी
मदिर मुस्कान बिखेरती 
स्वप्नों में खोई रहती |
जब भी ठकठक सुनती 
तंद्रा उसकी भंग होती 
आघात मन पर होता 
तभी वह विचार करती |
क्या कोइ स्थान नहीं उसका 
उस कर्मठ के जीवन में 
पर शायद वह सही न थी 
भावनाएं सब कुछ न थीं 
जीवन ऐसे नहीं चलता 
ना ही केवल कर्मठता से |
जो डूबा रहता भावों में 
कल्पना की उड़ानों  में
तब घर घर नहीं रहता 
संधर्ष सदा होता रहता |
यह कैसा संयोग कि 
दौनों साथ साथ रहते 
एक दूसरे को समझते 
आवश्यकताएं जानते 
एक की कर्मठता 
और दूसरे की भावनाएं 
यदि साथ ना होतीं 
जीवन कितना नीरस होता |
आशा







19 टिप्‍पणियां:

  1. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 22/05/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति .आभार . मेरी किस्मत ही ऐसी है .
    साथ ही जानिए संपत्ति के अधिकार का इतिहास संपत्ति का अधिकार -3महिलाओं के लिए अनोखी शुरुआत आज ही जुड़ेंWOMAN ABOUT MAN

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  3. अन्‍दर की बात करती अच्‍छी कविता।

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  4. बहुत ही बेहतरीन सुन्दर रचना,आभार है आपका.

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  5. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार २ १ / ५ /१ ३ को चर्चामंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां स्वागत है ।

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  6. आपकी यह रचना कल मंगलवार (21 -05-2013) को ब्लॉग प्रसारण अंक - २ पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  7. यह कैसा संयोग कि
    दौनों साथ साथ रहते
    एक दूसरे को समझते
    आवश्यकताएं जानते
    एक की कर्मठता
    और दूसरे की भावनाएं
    यदि साथ ना होतीं
    जीवन कितना नीरस होता |

    kitna sach aur behtareen likhte ho aap :)

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  8. एक की कर्मठता दुसरे की भावनाएं यदि साथ न होती तो जीवन कितना नीरस होता......... बहुतखुबसूरत रचना !!

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  9. एक की कर्मठता दुसरे की भावनाएं यदि साथ न होती तो जीवन कितना नीरस होता......... बहुतखुबसूरत रचना !!

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत ही सुन्दर रचना...आभार

    जवाब देंहटाएं
  11. दार्शनिकता से ओतप्रोत सुंदर रचना ! जीवन में जब कर्मठता और कोमल भावनाओं का श्रेष्ठ संतुलन होता है तब ही जीवन में पूर्णता का अहसास होता है ! बहुत बढ़िया रचना !

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  12. सच कहा है ... दोनों की जरूरत है जीवन में ... कभिकथोर तो कभी कोमल ...
    भावनामय रचना ...

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  13. कठोर और मृदुल में सुन्दर संतुलन ...वाह, अद्भुत !!!

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  14. अच्‍छी कविता बेहतरीन सुन्दर रचना दोनों की जरूरत है जीवन में

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  15. आपकी तमाम बेहतरीन रचनाओं में से एक ..बिलकुल सच कहा है आपने ..दोनों की उपस्थिति जीने के लिए अनिवार्य है ..सादर प्रणाम के साथ

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  16. अजीब मधुर संयोग है....
    सुन्दर और अद्भुत....

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  17. सुन्दर रचना. बिना दोनों के जीवन का पूरा आनंद कहाँ.

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  18. बहुत सुन्दर!!!!


    सादर
    अनु

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