26 जून, 2013

कुछ अलग सा

इतने बड़े जहान  में
महफिलें सजी बहारों की
चहुओर चहलपहल रहती
उदासी कोसों दूर दीखती |
पर वह अकिंचन
मदमस्त मलय के प्रहार  से
 आहत एकल सिक्ता कण सा
बहुत असहज हो जाता |
चमक दमक देख कर
अवांछित तत्व सा
कौने में सिमटता जाता
अपना मन टटोलना चाहता  |
लगते न जाने क्यूं वहां
सभी रिश्ते आधे अधूरे
 सतही लगते
अपनेपन से दूर
 रोज बनते बिगड़ते |
बदले जाते कपड़ों से
दिखावे से ओतप्रोत होते
एक भी नहीं उतरता
 दिल की गहराई तक |
वह वहां दिखाई देता
मखमल में लगे
 टाट के पेबंद सा
दूर जाना चाहता
 उस अछूते कौने में
जो हो आडम्बर से परे
 भीड़ भाड़ से मुक्त
जहां कोइ अपना हो
टूट कर उसे चाहे
बाहें फैलाए खडा हो
उसे अपने में समेटने को
प्यार की भाषा समझे
छिपाले उसे अपने दिल में |

आशा






29 टिप्‍पणियां:

  1. दिल की गहराई तक
    वह वहां दिखाई देता
    .................बिलकुल सही सुंदर प्रस्तुति।।

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    1. नेट की खराबी के कारण बहुत दिन बाद पोस्ट लगा पाई थी |टिप्पणी हेतु बधाई |
      आशा

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  2. आपकी यह रचना कल गुरुवार (27-06-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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    1. राजेन्द्र जी ब्लॉग प्रसारण पर अपनी रचना देखी |रचना चयन हेतु आभार |
      आशा

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 27/06/2013 को चर्चा मंच पर होगा
    कृपया पधारें
    धन्यवाद

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    उत्तर
    1. चर्चा मंच पर अपने रचना देखी |चयन हेतु आभीर |
      आशा

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  4. आपने लिखा....हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए शनिवार 29/06/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!


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  5. बहुत सुंदर रचना ! भावपूर्ण एवँ गहन दर्शन से ओत-प्रोत ! मन को विभोर कर गयी !

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  6. बहुत खूब, बढ़िया प्रतीक विधान भाव संयोजन और अभिव्यक्ति की मुखरता .

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  7. इस चकाचौंध भरी ज़िन्दगी का एक हिस्सा नज़र आते है आज के अधूरे रिश्ते...
    अति सुन्दर भाव....

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  8. टिप्पणी हेतु धन्यवाद |
    आशा

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  9. भीड़ भाड़ से मुक्त
    जहां कोइ अपना हो
    टूट कर उसे चाहे
    बाहें फैलाए खडा हो
    उसे अपने में समेटने को
    प्यार की भाषा समझे
    छिपाले उसे अपने दिल में |
    प्यार की चाहत पूर्ण रूप से पाने की -अति सुन्दर
    latest post जिज्ञासा ! जिज्ञासा !! जिज्ञासा !!!

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  10. जीवन दर्शन से भरी ... प्रेम की छोटी सी चाहत लिए ...
    लाजवाब रचना ...

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    1. रचना अच्छी लगी इस हेतु धन्यवाद |
      आशा

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  11. उत्तर
    1. टिप्पणी हेतु धन्यवाद सक्सेना जी |
      आशा

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  12. बहुत सुंदर एवं सार्थक रचना...

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    1. काफी समय बाद आज आपको ब्लॉग पर देख कर प्रसन्नता हुई
      टिप्पणी हेतु धन्यवाद |
      आशा

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  13. बहुत बेहतरीन

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  14. जीवन की चकाचौंध मे ...भीड़ मे भी अकेला मन ....बहुत सुंदर रचना ...
    शुभकामनायें ॰

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