03 जनवरी, 2014

भावनाओं का सैलाव

 भावनाओं  का सैलाव
 कहाँ ले जाएगा 
भेद अपने पराए में
 कर न पाएगा |
प्यार के सरोवर में
 तैरेगा कैसे 
किनारा है बहुत दूर
 पहुँच न पाएगा |
ये ही मन 
 अस्थिर करती हैं
कोइ नियंत्रण
नहीं इन पर |
बेचैन मन कब तक
दे साथ इनका
कहीं उलझ  न जाए
शिकारी के जाल में|
वह तो घात लगाए
बैठा होगा
जाने कब कोइ फँस जाए
उसके जाल में |
है कठिन
 नियंत्रण उन पर
पर सावधानी भी
 तो जरूरी है |
जब तैरना नहीं आता
क्या फ़ायदा
सरोबर में उतरने का
ज़रा सी भूल में
जीवन शेष हो जाएगा |
आशा |


12 टिप्‍पणियां:

  1. जब तैरना नहीं आता
    क्या फ़ायदा
    सरोबर में उतरने का
    ज़रा सी भूल में
    जीवन शेष हो जाएगा |
    बहुत सुन्दर !
    नया वर्ष २०१४ मंगलमय हो |सुख ,शांति ,स्वास्थ्यकर हो |कल्याणकारी हो |
    नई पोस्ट विचित्र प्रकृति
    नई पोस्ट नया वर्ष !

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  2. मन के असमंजस को दर्शाती सुंदर रचना ! बहुत बढ़िया !

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  3. बहुत सुन्दर।
    सुप्रभात।
    नववर्, में...
    स्वस्थ रहो प्रसन्न रहो।
    आपका दिन मंगलमय हो।

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (4-1-2014) "क्यों मौन मानवता" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1482 पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

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  5. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आपका-

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  6. बहुत सुंदर....नव वर्ष मंगलमय हो आपका....
    काफी उम्दा रचना....बधाई...बेहतरीन चित्रण....
    नयी रचना
    "एक नज़रिया"
    आभार

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  7. गहन भावयुक्त सुन्दर रचना ....आभार

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  8. आपकी इस प्रस्तुति को आज की बुलेटिन हिंदी ब्लॉग्गिंग और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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